जाड़ ह जनावत हे

जाड़ ह जनावत हे चिरई-चिरगुन पेड़ में बइठे,भारी चहचहावत हे। सुरूर-सुरूर हवा चलत,जाड़ ह अब जनावत हे।। हसिया धर के सुधा दीदी ,खेत डहर जावत हे। धान लुवत-लुवत दुलारी,सुघ्घर गाना गावत हे।। लू-लू के धान के,करपा ल मढ़ावत हे। सुरूर-सुरूर हवा चलत ,जाड़ ह अब जनावत हे।। पैरा डोरी बरत सरवन ,सब झन ल जोहारत हे। गाड़ा -बइला में जोर के सोनू ,भारा ल डोहारत हे।। धान ल मिंजे खातिर सुनील,मितान ल बलावत हे। सुरूर-सुरूर हवा चलत,जाड़ ह अब जनावत हे।। पानी ल छुबे त ,हाथ ह झिनझिनावत हे। मुँहू में डारबे त,दांत ह किनकिनावत हे।। अदरक वाला चाहा ह,बने अब सुहावत हे। सुरूर-सुरूर हवा चलत,जाड़ ह अब जनावत हे।। खेरेर-खेरेर लइका खाँसत,नाक ह बोहावत हे। डाक्टर कर लेग-लेग के,सूजी ल देवावत हे।। आनी-बानी के गोली-पानी, टानिक ल पियावत हे। सुरूर-सुरूर हवा चलत ,जाड़ ह अब जनावत हे।। पऊर साल के सेटर ल,पेटी ले निकालत हे। बांही ह छोटे होगे,लइका ह रिसावत हे।। जुन्ना ल नइ पहिनो कहिके,नावा सेटर लेवावत हे। सुरूर-सुरूर हवा चलत ,जाड़ ह अब जनावत हे।। रांधत - रांधत बहू ह,आगी ल अब तापत हे। लइका ल नउहा हे त ,कुड़क...