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Showing posts with the label हिन्दी रचना

स्वच्छता अभियान

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स्वच्छता अपनाओ आओ प्यारे मिलजुल करके , सब कोई हाथ बढायेंगे । बीमारी अब पास न आये  , गंदगी तुरंत भगायेंगे ।।1।। कूड़ा कचरा को मत फेंको , एक जगह सब डाले जाओ । कागज झिल्ली पुट्ठा रद...

पेड़ लगाओ

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पेड़ लगाओ आओ मिलकर पेड़ लगायें, सबको मिलेगी छाँव । हरी-भरी हो जाये धरती,  मस्त दिखेगा गाँव ।।1।। पेड़ों से मिलती हैं लकड़ी , सबके आती काम । जो बोते हैं बीज उसी का, चलता हरदम नाम ।...

शारदे वंदन

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शारदे वंदन चरण कमल में तेरे माता,  अपना शीश झुकाते हैं । ज्ञान बुद्धि के देने वाली,  तेरे ही गुण गाते हैं ।। श्वेत कमल में बैठी माता,  कर में पुस्तक रखती है । राजा हो या रंक सभी ...

बरखा रानी

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बरखा रानी ( सार छंद ) झूम रहे सब पौधे देखो , आई बरखा रानी । मौसम लगते बड़े सुहाने , गिरे झमाझम पानी ।।1।। हरी भरी धरती को देखो , हरियाली है छाई । बाग बगीचे दिखते सुंदर,  मस्ती सब में  आ...

सावन आया

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(म हेन्द्र देवांगन माटी की रच ना ) सावन आया सावन आया, सब किसान के मन को भाया । रिमझिम रिमझिम गिरता पानी,  टपके टप टप परछी छानी । हरा भरा सब खेत खार है , सुंदर दिखते मेंड़ पार है । चि...

आओ पेड़ लगायें

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आओ पेड़ लगायें चलो चलें एक पेड़ लगायें,  धरती में खुशहाली लायें । पेड़ लगाकर घेरा बनायें,  गाय बकरी से उसे बचायें । सुबह शाम हम पानी डालें,  सुरक्षा का उपाय अपना लें । धीरे धी...

तब कविता बन जाती है

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कोयल जब गाती है, मीठी तान सुनाती है । अपने मधुर स्वर से,  बागों को गुंजाती है । तब कविता बन जाती है । बादल जब गरजता है, बिजली भी चमकती है । आसमान में काले काले , घनघोर घटा छा जाती है । तब कविता बन जाती है । गाय जब रंभाती है, बछड़े को पिलाती है । गोधुली बेला में अपने, पैरों से धूल उड़ाती है । तब कविता बन जाती है । घर आँगन में फुदक फुदक कर , चिड़िया जब चहचहाती है । पायल की रुनझुन आवाज सुन, गुड़िया रानी खिलखिलाती है । तब कविता बन जाती है । बारिश की पहली फुहार ,जब तन मन को भिगाती है। माटी की सौंधी खुशबू, जब चारों ओर फैल जाती है । तब कविता बन जाती है । चलती है मस्त हवाएं जब , बागों से खुशबू आती है । कोई चाँद सा चेहरा जब , आँखों में बस जाती है । तब कविता बन जाती है । माँ अपने कोमल हाथों से, रोटी जब खिलाती है । खुद भूखी रहकर भी जब , बच्चों को दूध पिलाती है । तब कविता बन जाती है । महेन्द्र देवांगन "माटी" पंडरिया 8602407353 Mahendra Dewangan Mati 21/03/2018

माता की कृपा

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माता की कृपा *************** मां दुर्गा के चरणों में मैं, अपना शीश झुकाता हूँ । तेरे दर पे आकर माता, श्रद्धा के फूल चढाता हूँ । कोई न हो जग में दुखी मां , तेरी कृपा बनी रहे । बस इसी आशा से मैं, लो...

एक दीपक बन जायें

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करो कुछ ऐसा काम साथियों,घर घर खुशियां लायें । भूले भटके राह जनों का,एक दीपक बन जायें | चारों तरफ है आज अंधेरा,किसी को कुछ न सूझे। पथराई है सबकी आंखें,आशा की किरण बुझे । कर दें दू...

असली रावण को मारो

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भर गया है पाप का घड़ा, अब तो इसे निकालो । नकली रावण को छोड़कर, असली को अब मारो। गाँव गली में घूम रहे हैं, साधुओं के वेश में । राम नाम का माला जपते, बाबाओं के भेष में । जागो अब हनुमा...

आजादी का पर्व

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आजादी का पर्व *************** आजादी का पर्व मनाने, गाँव गली तक जायेंगे । तीन रंगों का प्यारा झंडा, शान से हम लहरायेंगे । नहीं भूलेंगे उन वीरों को , देश को जो आजाद किया । भारत मां की रक्षा खात...

अगस्त क्रांति

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अगस्त क्रांति ************ क्रांति का आगाज हो चुका, चुप नहीं बैठेंगे हम । जब तक पूर्ण न हो मांग हमारी,  नहीं लेंगे कोई दम । उठा चुके हैं मशाल हाथ में, अब नहीं बुझने देंगे । भभक उठी है क्रा...

ऊं नमः शिवाय

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ऊं नमः शिवाय ************** जय शिव शंभु दया करो,हम तेरे शरण में आये तेरे दर को छोड़ के बाबा, और कहां हम जायें । ओम नम: शिवाय, ओम नम:शिवाय  4 देवों के तुम देव हो बाबा, महादेव कहलाये सबका संकट हरने वाला, लीला अजब रचाये। ओम नम:शिवाय ओम नम:शिवाय - 4 औघड़ दानी तू है बाबा, सबको देने वाला दीन दुखियों के सहारा है , भक्तों का रखवाला । ओम नम:शिवाय, ओम नम:शिवाय - 4 विष का प्याला पीने वाला, नीलकंठ कहलाये जो भी आये तेरे शरण में, सबको गले लगाये। ओम नम: शिवाय, ओम नम: शिवाय - 4            महेन्द्र देवांगन माटी             पंडरिया छत्तीसगढ़ Mahendra Dewangan Mati