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बरवै छन्द

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बरवै छन्द (1) जंगल झाड़ी कटगे , लागय घाम । छँइहा के तो संगी , नइहे नाम । पेड़ लगावव भैया  , मिलही छाँव । हरियर दिखही भुँइया  , होही नाँव । (2) पानी लानव संगी , बढ़िया छान । गंदा ला झन पीयो , ले...

कुण्डलियाँ छन्द - 2

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कुण्डलियाँ छन्द --- 2 (1) धर के नाँगर खेत मा, जावत हवय किसान । माटी चिखला गोड़ मा , ओकर हे पहिचान ।। ओकर हे पहिचान , खेत मा अन्न उगाथे, सेवा करथे रोज,  तभे सब भोजन पाथे । खातू माटी धान,  सब...

कुण्डलियाँ छन्द -- 1

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कुण्डलियाँ (1) गरमी बाढ़त रोज के, कइसे रात पहाय । पंखा कूलर के बिना,  नींद घलव नइ आय ।। नींद घलव नइ आय , खून ला मच्छर पीये ,  हावय सब हलकान , आदमी कइसे जीये । पेड़ काट के आज , करे मनखे बेश...

रोला छन्द -- 2

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(1) झन बोलव जी झूठ , भेद हा खुलबे करही , करबे गलती काम , पाप भोगे ला परही । सत के रस्ता रेंग , देखथे ऊपर वाला , देवय सबके साथ,  जेन हावय रखवाला ।। (2) होवत हाहाकार , बाढ़ गे गरमी अइसे, तड़पत ह...