बरवै छन्द Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps - July 16, 2018 बरवै छन्द (1) जंगल झाड़ी कटगे , लागय घाम । छँइहा के तो संगी , नइहे नाम । पेड़ लगावव भैया , मिलही छाँव । हरियर दिखही भुँइया , होही नाँव । (2) पानी लानव संगी , बढ़िया छान । गंदा ला झन पीयो , ले... Read more
कुण्डलियाँ छन्द - 2 Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps - June 13, 2018 कुण्डलियाँ छन्द --- 2 (1) धर के नाँगर खेत मा, जावत हवय किसान । माटी चिखला गोड़ मा , ओकर हे पहिचान ।। ओकर हे पहिचान , खेत मा अन्न उगाथे, सेवा करथे रोज, तभे सब भोजन पाथे । खातू माटी धान, सब... Read more
कुण्डलियाँ छन्द -- 1 Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps - June 03, 2018 कुण्डलियाँ (1) गरमी बाढ़त रोज के, कइसे रात पहाय । पंखा कूलर के बिना, नींद घलव नइ आय ।। नींद घलव नइ आय , खून ला मच्छर पीये , हावय सब हलकान , आदमी कइसे जीये । पेड़ काट के आज , करे मनखे बेश... Read more
रोला छन्द -- 2 Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps - May 24, 2018 (1) झन बोलव जी झूठ , भेद हा खुलबे करही , करबे गलती काम , पाप भोगे ला परही । सत के रस्ता रेंग , देखथे ऊपर वाला , देवय सबके साथ, जेन हावय रखवाला ।। (2) होवत हाहाकार , बाढ़ गे गरमी अइसे, तड़पत ह... Read more