मोर छत्तीसगढ़ महतारी
*मोर छत्तीसगढ़* (गीत) मोर छत्तीसगढ़ महतारी हा , सरग बरोबर लागे । गुरतुर गुरतुर भाखा बोली , सबके मन ला भा गे ।। मोर छत्तीसगढ़ महतारी हा .......... ................ भेदभाव नइ जानय इँहा , सबके सेवा करथे । मिल बाँट के खाथे सुघ्घर , दुख पीरा ला हरथे । धरती दाई के सेवा खातिर, बिहना ले सब जागे । मोर छत्तीसगढ़ महतारी हा , सरग बरोबर लागे ।। आनी बानी तीज तिहार ला , मिलके सबो मनाथे । ...