ढोंगी बाबा *************** गाँव शहर मा घूमत हावय , कतको बाबा जोगी । कइसे जानबे तँहीं बता, कोन सहीं कोन ढोंगी ? बड़े बड़े गोटारन माला, घेंच मा पहिने रहिथे । मोर से बढ़के कोनों नइहे, अपन आप ला कहिथे । फँस जाथे ओकर जाल मा , गाँव के कतको रोगी । कइसे जानबे तँही बता, कोन सही कोन ढोंगी ? जगा जगा आश्रम खोल के, कतको चेला बनाथे । पढ़े लिखे चाहे अनपढ़ हो , सबला वोहा फंसाथे । आलीशान बंगला मा रहिके, सबला बुद्धू बनाथे । माया मोह ला छोड़ो कहिके, झूठा उपदेश सुनाथे । आश्रम अंदर कुकर्म करत हे, धन के हावय लोभी । कइसे जानबे तँही बता, कोन सही कोन ढोंगी ? जागव रे मोर भाई अब तो, एकर चाल ला जानव । छोड़ दे बाबा के चक्कर ला , घर के देवता ला मानव । अइसन अत्याचारी मन ला, मिल के सजा देवावव । पहिरे हावय साधु के चोला , ओकर नकाब उतारव । हमर संस्कृति ला बदनाम करत हे , अइसन पापी भोगी । कइसे जानबे तँही बता , कोन सही कोन ढोंगी ? गाँव शहर मा घूमत हावय , कतको बाबा जोगी । कइसे जानबे तँही बता, कोन सही कोन ढोंगी ? रचना महेन्द्र देवांगन "माटी" पंड...