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Showing posts with the label छत्तीसगढ़ी रचना

मकर संक्रांति मनाबो

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मकर संक्रांति तिल गुड़ के लाड़ू ला , मया बाँध के खाबो । आवव संगी जुर मिल के , मकर संक्रांति मनाबो ।। दक्षिण में हे सूरज हा , उत्तर में  अब जाही । पूस के जाड़ा अब्बड़ हाबे , वहू अब भगाही ...

नवा साल

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नवा साल धरे हवय मुरगा मटन , बोतल ल हलावत हे । घोण्डे हावय सूरा सहीं , नवा साल मनावत हे । वाह रे टेसिया टूरा , गली मा मटमटावत हे । चुँदी हावय कुकरी पाँख , हनी सिंह जइसे कटवावत हे । सब...

हाय रे मोर गोंदा फूल

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हाय रे मोर गोंदा फूल  हाय रे मोर गोंदा फूल , आँखी आँखी तैंहा झूल । चुकचुक ले दिखथस तैंहा , कइसे जाहूँ तोला भूल ।। मोहनी कस रुप हे तोर , लेथस तैंहा जीव ला मोर । का जादू तैं डारे हावस...

मनखे मनखे एक

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मनखे मनखे एक सत्य नाम के अलख जगा के , बाबा जी हा आइस । गाँव नगर मा घूम घूम के , झंडा ला फहराइस ।। मनखे मनखे एक हरे जी , भेदभाव झन मानव । सबके एके लहू हवय जी , एला सबझन जानव ।। दया करव सब ...

जाड़ लागत हे

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जाड़ लागत हे रिमझिम रिमझिम बिहनिया ले , गिरत हावय पानी । कुड़कुड़ कुड़कुड़ जाड़ लागत , याद आ गे नानी । हाथ गोड़ जुड़ा गेहे , तापत हावन आगी । सांय सांय धुंका चलत , का बतावँव रागी । चुनुन चु...

असली रावण मारो

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असली रावण मारो गली गली रावण घूमत हे , ओकर भुररी बारो । नकली रावण छोड़ो संगी , असली रावण मारो ।। रोज करत हे अत्याचारी , आँखी ला देखाथे । करथे दादागीरी अब्बड़ , तलवार ला उठाथे ।। हिम्...

आज के नेता

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आज के नेता  ( उल्लाला छंद) नेता हावय आज के  , कौड़ी ना हे काज के । माँगय पइसा रोज के  , जेब मा धरथे बोज के ।।1।। खावत रहिथे पान ला , खजवावत हे कान ला । मुंहू दिखथे लाल जी  , करिया करिया बा...

राखी के तिहार

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राखी के तिहार (महेन्द्र देवांगन माटी ) सावन के पावन महीना में, आइस राखी तिहार । राखी के बंधन में हावय , भाई बहन के प्यार । सजे हावय दुकान में,  आनी बानी के राखी । कोन ला लेवँव कोन ल...

मिलके सबझन लड़बो

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आज लेवत हन हम प्रतिज्ञा  , मिल जुल आघू बढ़बो । मांग पूरा नइ होही तब तक , मिलके सबझन लड़बो । नइ झुकन हम काकरो आघू  , चाहे कुछ हो जाये । अपन हक के खातिर लड़बो , चाहे तूफां आये । देना परही ...

नाग पंचमी

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नाग पंचमी (प्रिया देवांगन प्रियू ) नागपंचमी के तिहार हरे जी , मिलके सब मनाबो । नाग देव के पूजा करके , दूध वोला पियाबो । कोनों ल चाबे झन कहिके  , विनती  हमन करबो । फूल पान अउ दूध चढ़...

बरस जा बादर

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बरस जा बादर , गिर जा पानी, देखत हावन । तरसत हावन, तोर दरस बर, कहाँ जावन । आथे बादर, लालच देके, तुरंत भगाथे । गिरही पानी, अब तो कहिके, आश जगाथे । सुक्खा हावय, खेत खार हा,  कइसे बोवन । बइठ...

कीरा मकोड़ा

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कीरा मकोड़ा *********** संझा के बेरा मा , कीरा मकोड़ा आथे । दीया हा बरत रहिथे, उही मा आके झपाथे । रंग रंग के कीरा मकोड़ा , अब्बड़ उड़ाथे । एको ठन ला रमंज देबे , बिक्कट बस्साथे । खाय पीये के बेरा ...

किसानी के दिन

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किसानी के दिन आ गे दिन किसानी के अब , नाँगर धरे किसान । खातू कचरा डारत हावय , मिल के दूनों मितान । गाड़ा कोप्पर टूटहा परे , वोला अब सिरजावे । खूंटा पटनी छोल छाल के, कोल्लर ला लगावे ...

खटिया

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खटिया खटिया के गय जमाना, अब तो पलंग आ गे । पटवा डोरी अऊ बूच के, जमाना हा नँदागे । खटिया  में बइठे बबा , ढेंरा ला आँटे । सुख दुख के गोठ ला , सबो झन कर बाँटे । सगा पहुना सबोझन, खटिया मा ब...

तोर शरण मा आँवव

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तोर शरण मा आँवव जय अंबे जगदंबे भवानी, तोर महिमा ला गाँवव । दरशन दे दे मोला माता, तोर शरण मा आँवव । लकलक लकलक तोर रुप हे , अष्ट भुजा अवतारी । जगत के संकट तैंहर हरथस, सबके तैं महतारी ...

वेलेंटाइन डे

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*वेलेंटाइन डे* *के चक्कर* *********************** वेलेंटाइन डे के चक्कर में,  महूं एक ठन गुलाब लायेंव । हैप्पी वेलेंटाइन डे कहिके,  अपन बाई ल थमायेंव । वोला देखिस बाई ह , वहू ह लजागे । यहा ऊमर में तोल...

ढोंगी बाबा

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ढोंगी बाबा *************** गाँव शहर मा घूमत हावय , कतको बाबा जोगी । कइसे जानबे तँहीं बता, कोन सहीं कोन ढोंगी  ? बड़े बड़े गोटारन माला,  घेंच मा पहिने रहिथे । मोर से बढ़के कोनों नइहे,  अपन आप ला कहिथे । फँस जाथे ओकर जाल मा , गाँव के कतको रोगी । कइसे जानबे तँही बता,  कोन सही कोन ढोंगी ? जगा जगा आश्रम खोल के, कतको चेला बनाथे । पढ़े लिखे चाहे अनपढ़ हो , सबला वोहा फंसाथे । आलीशान बंगला मा रहिके, सबला बुद्धू बनाथे । माया मोह ला छोड़ो कहिके, झूठा उपदेश सुनाथे । आश्रम अंदर कुकर्म करत हे, धन के हावय लोभी । कइसे जानबे तँही बता, कोन सही कोन ढोंगी  ? जागव रे मोर भाई अब तो,  एकर चाल ला जानव । छोड़ दे बाबा के चक्कर ला , घर के देवता ला मानव । अइसन अत्याचारी मन ला,  मिल के सजा देवावव । पहिरे हावय साधु के चोला , ओकर नकाब उतारव । हमर संस्कृति ला बदनाम करत हे , अइसन पापी भोगी । कइसे जानबे तँही बता , कोन सही कोन ढोंगी  ? गाँव शहर मा घूमत हावय , कतको बाबा जोगी । कइसे जानबे तँही बता,  कोन सही कोन ढोंगी  ? रचना महेन्द्र देवांगन "माटी" पंड...

अकती

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अकती पुतरी पुतरा के बिहाव होवत हे , देखे बर सब आवव जी । नाचत हावय लइका मन हा, सुघ्घर गाना गावय जी । नेवतत हावय घर घर जाके , टीकावन मा आहू जी । झारा झारा नेवता हावय , खा के तुमन जाहू ज...

बारी के फूट

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बारी के फूट *************** वाह रे बारी के  फूट , फरे हस तैं चारों खूँट । बजार में आते साठ , लेथय आदमी लूट । दिखथे सुघ्घर गोल गोल, अब्बड़ येहा मिठाय । छोटे बड़े जम्मो मनखे , बड़ सऊंख से खाय । जेह...

दोहे के रंग

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दोहे के रंग गरम गरम हावा चलत ,  माथ पसीना आय । जेठ महीना घाम हा,  सबला बहुत जनाय ।।1।। मूड़ म साफी बाँध के, पानी पीके जाव  । रखव गोंदली जेब मा , *लू* से होत बचाव ।।2।। जनम दिवस के मौज मा , क...