मोर छत्तीसगढ़ महतारी
*मोर छत्तीसगढ़* (गीत)
मोर छत्तीसगढ़ महतारी हा , सरग बरोबर लागे ।
गुरतुर गुरतुर भाखा बोली , सबके मन ला भा गे ।।
मोर छत्तीसगढ़ महतारी हा .......... ................
भेदभाव नइ जानय इँहा ,
सबके सेवा करथे ।
मिल बाँट के खाथे सुघ्घर ,
दुख पीरा ला हरथे ।
धरती दाई के सेवा खातिर, बिहना ले सब जागे ।
मोर छत्तीसगढ़ महतारी हा , सरग बरोबर लागे ।।
आनी बानी तीज तिहार ला ,
मिलके सबो मनाथे ।
ठेठरी खुरमी चीला सोंहारी ,
घर घर सबो बनाथे ।
गुलगुल भजिया अबड़ मिठाथे , थरकुलिया मा माँगे ।
मोर छत्तीसगढ़ महतारी हा , सरग बरोबर लागे ।।
सीधा सादा मनखे इँहा ,
गारी गल्ला नइ जानय ।
घर मा आथे कोनों सगा ,
देवता सही मानय ।
देख इँहा के रीत रिवाज ला , दुनिया भर मा छा गे ।
मोर छत्तीसगढ़ महतारी हा , सरग बरोबर लागे ।।
*महेन्द्र देवांगन* *"माटी"*
*राजिम
*छत्तीसगढ़*
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