Posts

Showing posts from 2026

मोर छत्तीसगढ़ महतारी

*मोर छत्तीसगढ़* (गीत) मोर छत्तीसगढ़ महतारी हा , सरग बरोबर लागे । गुरतुर गुरतुर भाखा बोली , सबके मन ला भा गे ।। मोर छत्तीसगढ़ महतारी हा .......... ................               भेदभाव नइ जानय इँहा  ,                 सबके सेवा करथे ।                मिल बाँट के खाथे सुघ्घर ,                 दुख पीरा ला हरथे । धरती दाई के सेवा खातिर, बिहना ले सब जागे । मोर छत्तीसगढ़ महतारी हा , सरग बरोबर लागे ।।                आनी बानी तीज तिहार ला ,                  मिलके सबो मनाथे ।              ...

मटमटहा टूरा 1

मटमटहा टूरा ---------------- पढ़ई लिखई में ठिकाना नइहे ,गली में मटमटावत हे हार्न ल बजा बजा के ,फटफटी ल कुदावत हे | घेरी बेरी दरपन देख के , चुंदी ल संवारत हे । आनी बानी के किरीम लगा के ,चेहरा ल चमकावत हे | सूट बूट पहिन के निकले , चसमा ल लगावत हे । मुंहू में गुटका दबाके , सिगरेट के धुंवा उड़ावत हे | मोबाइल ल कान में लगाके , फुसुर फुसुर गोठियावत हे । फेसबुक अऊ वाटसप चलाके , मने मन मुस्कावत हे | संगी साथी संग घूम घूमके , आदत ल बिगाड़त हे । फोकट म खाय ल मिलत त , बाप के कमई ल उड़ावत हे | लाज शरम तो बेचा गेहे , कनिहा ल मटकावत हे । नाक ह तो पहिली ले कटा गेहे , अब कान ल छेदावत हे | ---------------- रचनाकार महेन्द्र देवांगन "माटी" राजिम मो. 8602407353

औघड़ दानी

औघड़ दानी भोले बाबा औघड़ दानी, जटा विराजे गंगा रानी । नाग गले में डाले घूमे , मस्ती से वह दिनभर झूमे।। कानों में हैं बिच्छी बाला, हाथ गले में पहने माला । भूत प्रेत सँग नाचे गाये, नेत्र बंद कर धुनी रमाये।। द्वार तुम्हारे जो भी आते, खाली हाथ न वापस जाते। माँगो जो भी वर वह देते, नहीं किसी से कुछ भी लेते।। आप सभी को महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ । महेन्द्र देवांगन माटी राजिम छत्तीसगढ़

कोरोना आल्हा छंद

कोरोना वायरस  (आल्हा छंद) फइले हे कोरोना संगी, मच गेह गा हाहाकार। चीन देश ले आये हावय, एकर आघू सबो लचार।। देश बिदेश सबो जग फैलत, मनखे हावय सब परशान। खतरा हावय अब्बड़ येहा, वैज्ञानिक मन हे हैरान ।। हाथ मुँहू ला धोवव सुघ्घर, साबुन सोडा रोज लगाव। साफ सफाई घर मा राखव, भीड़ भाड़ मा कभू न जाव।। सरदी खाँसी छीक ह आथे, डाक्टर कर तुरंत ले जाव। पानी ला उबाल के पीयव, कोरोना ला दूर भगाव।। हाथ मिलाना छोड़व संगी, कर धुरीहा ले नमस्कार । मुँहू कान ला बाँध के राखव, कोरोना के होही हार।। माँस मदिरा पीना छोड़व ,  ताजा भोजन घर मा खाव। बरतो सब सवधानी भैया , कोरोना ला झन डर्राव।। रचनाकार महेन्द्र देवांगन माटी राजिम छत्तीसगढ़ Mahendra Dewangan Mati @