सुरतांजलि


सुरतांजलि
लक्ष्मण मस्तुरिया

सुरता आथे रहि रहि मोला, तोर गीत ला गावँव।
छत्तीसगढ़ के मयारु बेटा,  तोला माथ नवावँव।।

जनम धरे तैं मस्तुरी म , मस्तूरिहा कहाये।
बचपन बीतिस खेलकूद मा, लक्ष्मण नाम धराये।।

तोर गीत हा सुघ्घर लागे, जन मन मा बस जाथे।
संग चलव जब कहिथस तैंहा, कतको झन हा आथे।।

अमर करे तैं नाम इँहा के,  माटी के तैं हीरा।
गिरे परे हपटे मनखे के, जाने तैंहर पीरा।।

अरपा पैरी महानदी कस, निरमल हावय बानी।
सब ला मया लुटाये तैंहर, हरिशचंद कस दानी।।

छछलत हावय तुमा नार हा, घर घर मा तैं बोंये।
सुरता करके आज सबोझन,  अंतस ले गा रोये।।

महेन्द्र देवांगन माटी
पंडरिया कबीरधाम
छत्तीसगढ़

Mahendra Dewangan Mati

Comments

  1. सुघ्घर कविता के माध्यम ले सादृ श्रद्धांजलि माटी जी

    ReplyDelete
  2. अब्बड़ सुग्घर सुरतांजलि माटी भइया सादर नमन 🙏🙏

    ReplyDelete
  3. राजस्थान विश्वविद्यालय Re-admission of online form will start after 18.06.2020 from 2: 0 pm
    Any student will have to keep the re-admission form, bank challan copy, and other documents with them. After applying for re-admission, hard copies of these documents will not be submitted to the concerned college or university right now.

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

तेरी अदाएँ

अगहन बिरसपति

वेलेंटटाइन डे के चक्कर