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Showing posts from April, 2018

गरमी बाढ़त

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गरमी अब्बड़ बाढ़त हे , कइसे दिन ल पहाबो । गरम गरम हावा चलत हे , कूलर पंखा चलाबो।। घेरी बेरी प्यास लगत हे , पानी दिनभर पियाथे । भात ह खवाय नही जी  , बासी गट गट लिलाथे। आमा के चटनी ह , ग...

तुलसी ( दोहा छन्द )

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घर अँगना अउ चौक मा , तुलसी पेड़ लगाव । पूजा करके प्रेम से ,    पानी रोज चढ़ाव ।।1।। तुलसी हावय जेन घर , वो घर स्वर्ग समान । रोग दोष सब दूर कर , घर मा लावय जान ।।2।। तुलसी पत्ता पीस के,  ...

उल्लाला छन्द - 3

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सुन राम नाम से होत हे , भव सागर हा पार जी । तँय सेवा करले दीन  के, जिनगी के दिन चार जी  ।। सुन जिनगी जब तक तोर हे ,  दया धरम अउ दान कर । तँय का ले जाबे साथ मा ,  सबके इँहचे मान कर ।। जब रइह...

उल्लाला छन्द -- 2

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13 - 13 में यति । विषम अउ सम चरण में तुकांत । करथे जेहा काम जी, ओकर होथे नाम जी । दया धरम अउ दान कर , सबके तेंहा मान कर ।। भेद भाव झन मान जी,  सबला अपने जान जी । सेवा करले दीन के,  कोनों ला झन ...

उल्लाला छंद - 1

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( 13 + 13 मात्रा । सम - सम चरण तुकांत ) जिनगी के हे चार दिन, सब ले मीठा बोल जी । कड़ुवा भाखा बोल के, अपन भेद झन खोल जी ।। गरमी अइसे बाढ़ गे , जीव सबो थर्राय जी । पानी नइहे बूँद भर , कइसे प्यास बुझ...

ढोंगी बाबा

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ढोंगी बाबा *************** गाँव शहर मा घूमत हावय , कतको बाबा जोगी । कइसे जानबे तँहीं बता, कोन सहीं कोन ढोंगी  ? बड़े बड़े गोटारन माला,  घेंच मा पहिने रहिथे । मोर से बढ़के कोनों नइहे,  अपन आप ला कहिथे । फँस जाथे ओकर जाल मा , गाँव के कतको रोगी । कइसे जानबे तँही बता,  कोन सही कोन ढोंगी ? जगा जगा आश्रम खोल के, कतको चेला बनाथे । पढ़े लिखे चाहे अनपढ़ हो , सबला वोहा फंसाथे । आलीशान बंगला मा रहिके, सबला बुद्धू बनाथे । माया मोह ला छोड़ो कहिके, झूठा उपदेश सुनाथे । आश्रम अंदर कुकर्म करत हे, धन के हावय लोभी । कइसे जानबे तँही बता, कोन सही कोन ढोंगी  ? जागव रे मोर भाई अब तो,  एकर चाल ला जानव । छोड़ दे बाबा के चक्कर ला , घर के देवता ला मानव । अइसन अत्याचारी मन ला,  मिल के सजा देवावव । पहिरे हावय साधु के चोला , ओकर नकाब उतारव । हमर संस्कृति ला बदनाम करत हे , अइसन पापी भोगी । कइसे जानबे तँही बता , कोन सही कोन ढोंगी  ? गाँव शहर मा घूमत हावय , कतको बाबा जोगी । कइसे जानबे तँही बता,  कोन सही कोन ढोंगी  ? रचना महेन्द्र देवांगन "माटी" पंड...

अकती

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अकती पुतरी पुतरा के बिहाव होवत हे , देखे बर सब आवव जी । नाचत हावय लइका मन हा, सुघ्घर गाना गावय जी । नेवतत हावय घर घर जाके , टीकावन मा आहू जी । झारा झारा नेवता हावय , खा के तुमन जाहू ज...

बारी के फूट

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बारी के फूट *************** वाह रे बारी के  फूट , फरे हस तैं चारों खूँट । बजार में आते साठ , लेथय आदमी लूट । दिखथे सुघ्घर गोल गोल, अब्बड़ येहा मिठाय । छोटे बड़े जम्मो मनखे , बड़ सऊंख से खाय । जेह...

दोहे के रंग

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दोहे के रंग गरम गरम हावा चलत ,  माथ पसीना आय । जेठ महीना घाम हा,  सबला बहुत जनाय ।।1।। मूड़ म साफी बाँध के, पानी पीके जाव  । रखव गोंदली जेब मा , *लू* से होत बचाव ।।2।। जनम दिवस के मौज मा , क...