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Showing posts from March, 2018

जय महावीर

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सत्य मार्ग पर चलकर जिसने, जीना हमको सीखलाया । दया करो सब प्राणियों पर , अहिंसा का मार्ग हमें बतलाया । सुख और दुख आते जीवन में, यह तो ईश्वर की रचना है । विचलीत ना हो कभी दुख में,  म...

तब कविता बन जाती है

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कोयल जब गाती है, मीठी तान सुनाती है । अपने मधुर स्वर से,  बागों को गुंजाती है । तब कविता बन जाती है । बादल जब गरजता है, बिजली भी चमकती है । आसमान में काले काले , घनघोर घटा छा जाती है । तब कविता बन जाती है । गाय जब रंभाती है, बछड़े को पिलाती है । गोधुली बेला में अपने, पैरों से धूल उड़ाती है । तब कविता बन जाती है । घर आँगन में फुदक फुदक कर , चिड़िया जब चहचहाती है । पायल की रुनझुन आवाज सुन, गुड़िया रानी खिलखिलाती है । तब कविता बन जाती है । बारिश की पहली फुहार ,जब तन मन को भिगाती है। माटी की सौंधी खुशबू, जब चारों ओर फैल जाती है । तब कविता बन जाती है । चलती है मस्त हवाएं जब , बागों से खुशबू आती है । कोई चाँद सा चेहरा जब , आँखों में बस जाती है । तब कविता बन जाती है । माँ अपने कोमल हाथों से, रोटी जब खिलाती है । खुद भूखी रहकर भी जब , बच्चों को दूध पिलाती है । तब कविता बन जाती है । महेन्द्र देवांगन "माटी" पंडरिया 8602407353 Mahendra Dewangan Mati 21/03/2018

माटी के दोहे - 1

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(1) माटी के काया हरय,  माटी मा मिल जाय । झन कर गरब गुमान तैं , काम तोर नइ आय ।। (2) गाँव गाँव बाजा बजे,  गावत हावय फाग । रंग गुलाल उड़ात हे , झोंकय सब झन राग ।। (3) आमा मउरे बाग मा , कोयल मारत कूक ...

लिखात नइहे

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लिखात नइहे लिखे बर बइठे हंव , फेर लिखात नइहे । गुनत हांवव मने मन , फेर गुनात नइहे । एको ठन कविता ला , महूं बना लेतेंव । फेसबुक अऊ वाटसप में, तुरते भेज देतेंव । सोचत हांवव मने मन , फे...

कलिन्दर

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कलिन्दर ************ वाह रे कलिन्दर , लाल लाल दिखथे अंदर । बखरी मा फरे रहिथे  , खाथे अब्बड़ बंदर । गरमी के दिन में,  सबला बने सुहाथे । नानचुक खाबे ताहन, खानेच खान भाथे । बड़े बड़े कलिन्दर ...

माटी के दोहे -- 2

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रोज रोज मारत हवय, गोली पाकिस्तान । समझौता ला टोरथे ,  लबरा ओला जान ।।1।। करजा लेके भाग गे , बड़े बड़े धनवान । देखत रहिगे देश हा,  होगे मरे बिहान ।।2।। करजा मा बूड़े हवय,  छोटे बड़े ...

मुनु बिलई

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मुनु बिलई ********* मुनु बिलई मुनु बिलई, हमर घर आथे मुनु बिलई, म्याऊ म्याऊ ओकर चिल्लई । लुका छुपी के  खेल खेलई, हमर घर आथे मुनु बिलई । मुसवा देखे पल्ला भगई , बिला भीतरी ओकर लुकई। खिसिय...