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Showing posts from 2016

छत्तीसगढ़ी भासा

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छत्तीसगढ़ी भासा ल पढबो अऊ पढाबोन हमर राज ल जुर मिलके, सबझन आघू बढाबोन । नोनी पढही बाबू पढही, पढही लइका के दाई । डोकरा पढही डोकरी पढही, पढही ममा दाई । इसकूल आफिस सबो जगा,छत्तीसगढ़ी में गोठियाबोन। अपन भासा बोली ल, बोले बर कार लजाबोन । कतको देश विदेश में पढले, फेर छत्तीसगढ़ी ल नइ भुलावन । अपन रिती रिवाज ल संगी , कभू नइ  गंवावन । काम काज के भासा घलो, छत्तीसगढ़ी ल बनाबोन । देश विदेश सबो जगा, एकर मान बढाबोन । रचना महेन्द्र देवांगन "माटी "     पंडरिया 8602407353

जाड़ बाढ़त हे

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जाड़ बाढ़त हे ****************** सुर सुर सुर सुर हवा चलत हे, जाड़ अब्बड़ बाढ़हत हे बिहनिया के होते साठ डोकरी ह आगी  बारत हे। जुड़ पानी ल छुये नइ सकस, तात पानी ल मढहावत हे, लोग लइका के नाक बोहावत, ड...

रोटियां

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रोटियां ********** गोल गोल जब घर में, बनती हैं रोटियां खाकर मन तृप्त हो जाती है रोटियां। आते ही घर में, पानी देती है बेटियाँ गरम गरम तुरंत, खिलाती हैं रोटियां । चंदा सा गोल , जब बनती हैं ...

मोदी बम

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मोदी बम फूटगे, काला धन वाला मन के पसीना छूटगे। पइसा के दम में बड़ अटियाय, छोटे आदमी मन से, सोजबाय नइ गोठियाय । अब तो भात ह नइ खवावत हे, पानी तक ह टोंटा में नइ लिलावत हे। रात रात भर ...

माटी के दीया

माटी के दीया जलावव ************ माटी के दीया जलावव संगी, माटी के दीया जलावव । चाइना माल के चक्कर छोड़ो, स्वदेसी ल अपनावव। माटी के दीया  ........................ बइठे हे कुमहारिन दाई, देखत हाबे रसता । राखे ह...

वाह रे परदेसिया

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वाह रे परदेसिया ***************** वाह रे परदेसिया हो, चाल चलेव तुमन बढ़िया बढ़िया । छत्तीसगढिया सबले बढ़िया कहिके, कर देव खड़िया खड़िया । हमर राज में आके तुमन, हमी ल आंखी देखायेव। हमरे मा...

रावण मरा नहीं

रावण मरा नहीं ****************** रावण मरा नहीं, अधमरा भाग गया । इसीलिए तो आज, घर घर फिर जाग गया । कल तक मरने का नाटक किया , सबके ऊपर त्राटक किया। दुनिया को धोखा देकर, अहं उसका जाग गया । रावण मरा न...

देवारी तिहार आवत हे

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देवारी तिहार आवत हे ***************** फुरुर फुरुर हावा चलत,जाड़ ह जनावत हे । दसेरा ह भुलकगे, देवारी ह अब आवत हे । माटी के कोठ ल, दाई ह छबनावत हे। ओदरे हे चंऊरा ह, बबा ह बनावत हे। भर भर के गाड़ा मे...

दाई के मया

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दाई के मया ************** तोर मया के अंचरा में दाई, खेलेंव कूदेंव बढेंव । पढ़ लिख के हुसियार बनेंव, जिनगी के रसता गढेंव। सोज रसता म तैं चलाये, कांटा कभू नइ गड़ेंव । मया के झूलना म तैं झुलाये, ...

दाई के मया

दाई के मया ************** तोर मया के अंचरा में दाई, खेलेंव कूदेंव बढेंव । पढ़ लिख के हुसियार बनेंव, जिनगी के रसता गढेंव। सोज रसता म तैं चलाये, कांटा कभू नइ गड़ेंव । मया के झूलना म तैं झुलाये, ...

जय गनेस देवता

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जय गनेस देवता ***************** जय गनेस देवता, पहिली सुमरनी गांवव तोर गियान बुद्धि के देने वाला -2, हरले संकट मोर जय गनेस देवता :::::::::::::::: लंबा लंबा सूंड़ हाबे अऊ, पेट हे बड़ भारी सूपा जइसे कान हाबे त...

काबर आथे तीजा

काबर आथे तीजा ***************** काबर आथे संगी तीजा, चार दिन में हमरो निकलगे बीजा । बिहनिया उठ के, चाहा ल डबकावत हों , कभू मीठ त कभू, सीटठा ढरकावत हों । रतिहा के बरतन ल,बिहनिया मांजत हों, दुवारी ...

नंदावत पोरा तिहार

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पोरा पटकई ह घलो नंदावत हे , कोनों ह अब पटके ल नइ जावत हे । घर में खुसरे खुसरे पोरा मनावत हे , ठेठरी खुरमी ल मुसुर मुसुर खावत हे । माटी के बइला में चीला चढावत हे , ठेठरी खुरमी ल सींग ...

जय गनेस देवा

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जय गनेस देवा ********************* हिन्दू धरम में कोई भी काम करथे त सबसे पहिली गनेस जी के पूजा करे जाथे । गनेस जी ह मंगलकारी अऊ विघ्नहर्ता देवता हरे ।            भादो महिना में चतुरथी से ले के च...

पोरा तिहार

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चल पोरा तिहार मनाबोन, ठेठरी खुरमी अऊ चीला बनाबोन । नंदिया बइला में चढाबोन, सिल्ली लगा के दऊड़ाबोन। चुकी पोरा ल सजाबोन, जांता ल चलाबोन। देवी देवता ल मनाबोन, चल पोरा तिहार मना...

तीजा पोरा

तीजा पोरा ************* तीजा पोरा आत हे, एती भाटों के करलई देखे नइ जात हे। दीदी ह मने मन में हांसत हे , भाटों ह जाग जाग के खांसत हे । दीदी ह अपन कपड़ा लत्ता ल जोरत हे , भाटों ह मने मन में रोवत हे ...

अपना समाज

अपना समाज ************* अलग अलग है जाति सबका अलग अलग है काम । मिलजुल कर रहते हैं सभी तभी तो बनता है समाज । भेदभाव नहीं करते कभी सबका सहयोग करते हैं । जो भी संकट आये किसी पर सब मिलकर हल करत...

सावन सोमवारी

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सावन सोमवारी अऊ शिवजी ******************** सावन के महिना ह सबला सुघ्घर लागथे । रिमझिम रिमझिम पानी गिरत रथे अऊ किसान मन ह गाना गावत खेती किसानी में बुड़े रहिथे । उही समय में आथे सावन सोमवारी ...

हाईकू 1

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हाईकू ******** (1) आया सावन झूमें मनभावन लगे पावन । (2) छा गई घटा कुहरों से है पटा निराली छटा । (3) भीगी पलकें सावन सा झलके कराह हल्के । (4) भीगता तन विचलित सा मन अपनापन । (5) भागते लोग सुविधाओं का भोग करते योग । (6) निकले पेट जमीन पर लेट बैठते सेठ । ***************** ले   रचना महेन्द्र देवांगन माटी  ( बोरसी - राजिम वाले ) गोपीबंद पारा पंडरिया जिला  - कबीरधाम ( छ ग ) mahendradewanganmati@gmail.com

माटी मोर मितान

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माटी मोर मितान **************** सुक्खा भुंइया ल हरियर करथंव, मय भारत के किसान धरती दाई के सेवा करथंव, माटी मोर मितान । बड़े बिहनिया बेरा उवत, सुत के मय ऊठ जाथंव धरती दाई के पंइया पर के, काम बु...

बादर ह बदरावत हे

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बादर ह बदरावत हे ***************** बरसा के दिन आगे संगी ,बादर ह बदरावत हे सुरूर सुरूर हावा चलत,पेड़ सबो लहरावत हे पुचुक पुचुक मेचका कूदे, पानी में टररावत हे उल्हा उल्हा पाना देखके, कोयली गा...

जय शेरों वाली माँ

"जय शेरों वाली माँ " ****************** जय शेरों वाली जय खप्पर वाली शरण में आये हन तोर------2 बीच सभा में गावत हों माता-2,रख लेबे लाजे मोर जय शेरों वाली --------------------- कोई काली कोई चंडी,कोई दुरगा कहिथे जब जब संकट ...

मोर छत्तीसगढ़ के कोरा में

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गीत ****** मोर छत्तीसगढ़ के कोरा में, किसम किसम के फूल -2 हीरा कस हे इंहा के माटी-2,चंदन कस हे धूल मोर छत्तीसगढ़ के ---------------------------------। बड़े बड़े ज्ञानी मुनि मन,एकर कोरा में आइस -2 इही माटी में खेलकूद के, जीवन सफल बनाइस करीस तपस्या कतको झन ह-2,कैसे जाबो भूल मोर छत्तीसगढ़ के ---------------------------------। इंहा के बेटा बड़े सबूत हे,मेहनत करके खाथे-2 धरती दाई के सेवा करके, धान ल उपजाथे हरियर हरियर देख के सबके-2,मन हर जाथे झूले मोर छत्तीसगढ़ के कोरा ------------------------। बड़ सीधवा हे इंहा के मनखे, लड़ई झगरा नइ जाने जाति पांति के भेद ल संगी, कभू इंहा नइ माने सबके आदर मान करत हे-2,रखते इज्जत कूल मोर छत्तीसगढ़ के कोरा में -----------------------। छत्तीसगढ़ के कोरा में संगी,छत्तीसों भाषा हाबे इंहा के जइसे भाखा बोली, अऊ कहां तै पाबे किसम किसम के भासा बोली-2,सब मिल जाथे घूल मोर छत्तीसगढ़ के कोरा ---------------------------। हीरा कस हे-------------------------------------------।। रचना  महेन्द्र देवांगन माटी