Tuesday, 23 August 2016

तीजा पोरा

तीजा पोरा
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तीजा पोरा आत हे,
एती भाटों के करलई देखे नइ जात हे।
दीदी ह मने मन में हांसत हे ,
भाटों ह जाग जाग के खांसत हे ।
दीदी ह अपन कपड़ा लत्ता ल जोरत हे ,
भाटों ह मने मन में रोवत हे ।
दीदी ह फोन कर करके बलावत हे ,
भाटों के जीव ल अऊ जलावत हे ।
दीदी ह जाय के जोरा करत हे ,
एती भाटों के नींद नइ परत हे ।
तीजा पोरा आत हे
एती भाटों के करलई देखे नइ जात हे।
दीदी ह मइके में तेलई बइठे हे ,
एती भाटों ह भूख के मारे अइठे हे ।
एक बेर के रांधे ल , भाटों दू बेर खावत हे ,
ओती दीदी ह घेरी बेरी लोटा धरके जावत हे ।
एती भाटों के पेट ह सप सप करत हे ,
ओती दीदी ह बरा सोंहारी खाके फस फस करत हे ।

रचना
महेन्द्र देवांगन "माटी"
(बोरसी - राजिम वाले )
9993243141

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