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Showing posts from September, 2018

अभिलाषा

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अभिलाषा  ( ताटंक छन्द ) मातृभूमि पर शीश चढाऊँ,  एक यही अभिलाषा है ।  झुकने दूंगा नहीं  तिरंगा ,  मेरे मन की आशा है ।।1। नित नित वंदन करुँ मै माता,  तुम तो पालन हारी हो । कभी कष्ट ना ...

पर्यावरण पच्चीसी

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पर्यावरण पच्चीसी स्वच्छ रखो पर्यावरण,  सभी लगाओ पेड़ । रहे सदा खुशहाल सब , प्रकृति को मत छेड़ ।।1।। शुद्ध रखो पर्यावरण,  स्वस्थ रहे परिवार । खान पान भी शुद्ध हो , कोइ न हो बीमार ...

आज के नेता

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आज के नेता  ( उल्लाला छंद) नेता हावय आज के  , कौड़ी ना हे काज के । माँगय पइसा रोज के  , जेब मा धरथे बोज के ।।1।। खावत रहिथे पान ला , खजवावत हे कान ला । मुंहू दिखथे लाल जी  , करिया करिया बा...

स्वच्छता अभियान

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स्वच्छता अपनाओ आओ प्यारे मिलजुल करके , सब कोई हाथ बढायेंगे । बीमारी अब पास न आये  , गंदगी तुरंत भगायेंगे ।।1।। कूड़ा कचरा को मत फेंको , एक जगह सब डाले जाओ । कागज झिल्ली पुट्ठा रद...

पेड़ लगाओ

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पेड़ लगाओ आओ मिलकर पेड़ लगायें, सबको मिलेगी छाँव । हरी-भरी हो जाये धरती,  मस्त दिखेगा गाँव ।।1।। पेड़ों से मिलती हैं लकड़ी , सबके आती काम । जो बोते हैं बीज उसी का, चलता हरदम नाम ।...

शारदे वंदन

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शारदे वंदन चरण कमल में तेरे माता,  अपना शीश झुकाते हैं । ज्ञान बुद्धि के देने वाली,  तेरे ही गुण गाते हैं ।। श्वेत कमल में बैठी माता,  कर में पुस्तक रखती है । राजा हो या रंक सभी ...

बादर गरजे ( कुकुभ छंद)

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बादर गरजे बादर गरजे बिजली चमके,  अब दादुर शोर मचाये । रहि रहि के जियरा हा काँपे,  जब करिया बादर  छाये ।।1।। बिजली चमके अइसे जइसे,  कोनों हा खींचे फोटू । डर के मारे भागे सबझन,  आँ...

राम नाम जप ले

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राम नाम जप ले  राम नाम ला जप ले भैया,  इही काम गा सब आही । चारे दिन के हावय जिनगी,  सँग मा तोरे का जाही ।।1।। कतको रखबे दौलत तैंहा , सब माटी मा मिल जाही । कुटुम कबीला जम्मो झन हा,  लूट ...

पेड़ लगावव ( कुकुभ छंद)

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पेड़ लगावव (कुकुभ छंद) पेड़ लगावव मिलजुल संगी , तभे तुमन फल पाहू जी । बड़का होही बिरवा तब तो , सबझन छँइहा पाहू जी ।।1।। मिलही छ़ँइहा घर अँगना मा , पंछी के होही डेरा । चिरई चिरगुन चह...

नमन करें

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नमन करें ( ताटंक छंद) नमन करें हम मातु पिता को ,  श्रद्धा सुमन चढाते है । नमन करें हम गुरु चरणों को ,  हमको राह दिखाते हैं ।।1।। नमन करें हम धरती अंबर ,  सूरज चाँद सितारों  को । नमन करें परिवार जनों को , सुख दुख के सब प्यारों को ।।2।। नमन करें हम देवी देवत ,  जग के पालन हारी को । नमन करें हम पशु पक्षी को , उड़ते सब नभचारी को ।।3।। नमन करें हम अरुण वरुण को , सबके जीवन दाता हैं । नमन करें हम मातृभूमि को , जो हम सबकी माता है ।।4।। नमन करें पर्वत पठार को ,  नदियाँ झरने घाटी को । नमन करें हम इस वसुधा के,  कण कण पावन माटी को ।।5।। महेन्द्र देवांगन माटी पंडरिया  (कवर्धा) छत्तीसगढ़ Mahendra Dewangan Mati 25/09/18 16 + 14 = 30 मात्रा पदांत 3 गुरु

बरखा रानी

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बरखा रानी ( सार छंद ) झूम रहे सब पौधे देखो , आई बरखा रानी । मौसम लगते बड़े सुहाने , गिरे झमाझम पानी ।।1।। हरी भरी धरती को देखो , हरियाली है छाई । बाग बगीचे दिखते सुंदर,  मस्ती सब में  आ...

गुरु (दोहे )

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गुरु गुरू बिना मिलथे कहाँ,  कोनों ला जी ज्ञान । कर ले कतको जाप तैं , चाहे देदव जान ।।1।। नाम गुरू के जाप कर , तैंहा बारम्बार । मिलही रस्ता ज्ञान के  , होही बेड़ापार ।।2।। छोड़व झन अब ह...

किशन कन्हैया

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किशन कन्हैया छन्न पकैया पकैया  , नाचे किशन कन्हैया । गोप ग्वाल सब ताली पीटे,  नाचत ताता थैया ।।1।। छन्न पकैया छन्न पकैया  , मुरली मधुर बजाये । बंशी के धुन सुन के भैया  , राधा दौड...

बाल कृष्ण

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बाल कृष्ण  ( सार छन्द में ) बाल कृष्ण के लीला भारी , बोले नटवर लाला । राधा क्यों गोरी है मैया , मैं क्यों बिल्कुल काला ।। बात अजब सुनकर के मैया , मंद मंद मुस्काये । ऐसे क्यों कहता ह...

भोर हुआ

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भोर हुआ ( सार छन्द में ) भोर हुआ सूरज उग आया,  चिड़ियाँ पाँखे खोले । छत के ऊपर आ बैठी है,  चींव चींव वह बोले ।। सरसर सरसर हवा चली है, मौसम हुआ सुहाना । फूलों से खुशबू जब आये, भौंरा गा...