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Showing posts from August, 2018

पर्यावरण दोहे

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पर्यावरण पेड़ लगाओ मिल सभी,  देते हैं जी  छाँव । शुद्ध हवा सबको मिले  , पर्यावरण बचाव ।।1।। पेड़ों से मिलती हमें , लकड़ी फल औ फूल । गाँव गली में छोरियाँ  , रस्सी बाँधे झूल  ।।2।। ...

गेंड़ी

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छन्न पकैया छन्न पकैया, सावन आ गे भइया । हरियर हरियर चारों कोती, चरे घास ला गइया ।। छन्न पकैया छन्न पकैया,  कर ले नाँगर पूजा । मया प्रेम ला राखे रहिबे, झन करबे तैं दूजा ।। छन्न पक...

लहरा ले ले

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छन्न पकैया छन्न पकैया  , लहरा ले ले भैया । पाप सबो कट जाही तोरे , हावय गंगा मैया ।।1।। छन्न पकैया छन्न पकैया,  दान धरम ला कर ले । नाम तोर रहि जाही जग मा , पुन के झोली भर ले ।।2।। छन्न प...

बरसा पानी

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छन्न पकैया छन्न पकैया  , आ गे बरसा पानी । नदियाँ नरवा लहरा मारे , होय करेजा चानी ।।1।। छन्न पकैया छन्न पकैया  , डोंगा हा लहरावे । काँपत हावय पोटा संगी , कइसे पार लगावे ।।2।। छन्न प...

नशा पान

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छन्न पकैया छन्न पकैया  , नशा पान ला छोड़ो । होथे जी बीमारी अब्बड़  , एकर से मुँह मोड़ो ।।1।। छन्न पकैया छन्न पकैया  , गुटखा जेहा खाथे । केंसर होथे वोला संगी ,  अब्बड़ दुख ला पाथे ।।...

झंडा ला फहराबो

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देश हमर हे सबले प्यारा , येकर मान बढ़ाबो । नइ झूकन देन हम तिरंगा , झंडा ला फहराबो ।। भेदभाव ला छोड़ के सँगी , सब झन आघू बढ़बो । हिन्दू मुस्लिम सिक्ख इसाई , मिल के हम सब लड़बो ।। अपन ...

मोबाइल

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आज काल के नोनी बाबू , मोबाइल ला धरथे । फुसुर फुसुर दूसर के सँग मा , बात अबड़ जी करथे ।। दिन भर देखत रहिथे वोला , भात घलो नइ खाये । आनी बानी पिक्चर देखे , रँग रँग गाना गाये ।। काम बुता त...

बादर आवय

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उमड़त घुमड़त बादर आवय , गिरय झमाझम पानी । आ गे सावन महीना सँगी , चूहत परछी छानी ।। गाँव गली मा पानी भरगे,  बोहावत हे रेला । लइका मन सब नाचत कूदत , खेलत हावय खेला ।। खेत खार मा चिखला म...

माटी के चोला ( सार छन्द )

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माटी के चोला  राम भजन ला गा ले भैया,  इही काम गा आही । माटी के चोला हा संगी , माटी मा मिल जाही ।। कतको धन दौलत ला रखबे , काम तोर नइ आये । छूट जही जब जीव ह तोरे,  सँग मा कुछु नइ जाये ।। दे...

अमृत ध्वनि छंद

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अमृत ध्वनि छन्द (1) आइस सावन झूम के, दिखय घटा घनघोर । बिजुरी चमके जोर से, नाचय वन मा मोर ।। नाचय वन मा , मोर पंख ला, अपन उठाके, देखय सबझन, आँखी फारे, हँसय लुकाके । चिरई चिरगुन, ताली पीट...

भाजी पाला

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भाजी पाला भाजी पाला हा बने , गरमी माह सुहाय । फोरन दे के राँध ले , अब्बड़ भात खवाय ।। भौजी जाय बजार मा , लावय भाजी चेंच । भैया मन भर खात हे , लमा लमा के घेंच ।। तिंवरा भाजी देख के,  मन ह...

बेटी बेटा

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बेटी बेटा भेदभाव ला छोड़ के  , दूनों ला तँय मान । बेटी  बेटा  एक  हे ,  कुल के दीपक जान ।। रौशन करथे एक दिन , दो दो कुल के नाम । बेटी बने पढ़ाव जी  , बनही बिगड़े काम ।। पढ़े लिखे से होत ...

गणेश वंदना ( दोहे )

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गणेश वंदना ( दोहा छन्द ) ************* पहिली पूजा तोर हे , गण नायक महराज । हाथ जोड़ विनती हवय , पूरा कर दे काज ।। आये हावन तोर कर , लेके छप्पन भोग । सबो कष्ट ला दूर कर , माँगत हे सब लोग ।। हाथी जइसे ...

राखी के तिहार

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राखी के तिहार (महेन्द्र देवांगन माटी ) सावन के पावन महीना में, आइस राखी तिहार । राखी के बंधन में हावय , भाई बहन के प्यार । सजे हावय दुकान में,  आनी बानी के राखी । कोन ला लेवँव कोन ल...

मिलके सबझन लड़बो

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आज लेवत हन हम प्रतिज्ञा  , मिल जुल आघू बढ़बो । मांग पूरा नइ होही तब तक , मिलके सबझन लड़बो । नइ झुकन हम काकरो आघू  , चाहे कुछ हो जाये । अपन हक के खातिर लड़बो , चाहे तूफां आये । देना परही ...

माटी के दोहे

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बेटी बेटा एक हे , होथे घर के शान । दूनों कुल के दीप हे , एला तेंहा मान ।। झन कर गरब गुमान तैं , आये खाली हाथ । राखे धन ला जोर के,  नइ जाये वो साथ ।। पढ़ लिख के आघू बढ़त,  जग मा नारी आज । दे...

माता दुर्गा

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माता दुर्गा माता दुर्गा राख ले , हमरो तैंहा लाज । आये हावन तीर मा , पूरा कर दे काज ।। नान नान लइका हमन , सेवा  करथन तोर । सबके संकट दूर कर , विनती सुनले मोर ।। दरशन खातिर तोर माँ, नर न...

जागव

जागव  दूसर राज के कोलिहा मन , शेर सही गुर्रावत हे । हमरे राज में आके संगी , हमी ल आंखी देखावत हे  छत्तीसगढ़ीया सबले बढ़िया, सुन सुन के आवत हे । थारी लोटा धर के आइस तेमन , अपन धाक जमावत हे । जेन ल हम ह जगा देहन , उही हक जमावत हे । हमर घर हे टूटहा फूटहा, वो महल अटारी बनावत हे । पहुना होथे भगवान बरोबर,  थारी थारी खवावत हे । उही थारी में छेदा करके, अब चार आंसू रोवावत हे । जागो जी सब छत्तीसगढ़ीया, अब तो होश में आवव । छत्तीसगढ़ के लाज रखे बर , सबझन आवाज उठावव । रचना महेन्द्र देवांगन माटी  पंडरिया कवर्धा  छत्तीसगढ़  Mahendra Dewangan Mati 

बेटी

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बेटी  ( सरसी छन्द ) (1) मारव झन जी बेटी ला अब , येला लक्ष्मी जान । नाम कमाथे जग मा सुघ्घर,  बेटा जइसे मान ।। अबला नइहे नारी अब तो,  हे दुर्गा अवतार । रक्षा अपन करे खातिर बर , धर लेथे तलवा...

आबे हमर गाँव

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आबे हमर गाँव  (सरसी छन्द ) आबे तैंहर गाँव हमर जी, बर पीपर के छाँव । देखत रइहूँ रस्ता तोरे, माटी मोरे नाँव ।। चारों कोती हरियर हरियर , हावय खेती खार । गाय चरावत रहिथे भोला , बइठे तरि...

सरसी छन्द

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सरसी छन्द  ( महेन्द्र देवांगन माटी ) (1) वीणा वाली हंस सवारी , सुन ले मोर पुकार । तोर शरण मा आये हाँवव  , मोला  तैंहर तार । मँय अज्ञानी बालक माता,  नइहे मोला ज्ञान । आ के  कंठ बिराजो द...