गीत ****** मोर छत्तीसगढ़ के कोरा में, किसम किसम के फूल -2 हीरा कस हे इंहा के माटी-2,चंदन कस हे धूल मोर छत्तीसगढ़ के ---------------------------------। बड़े बड़े ज्ञानी मुनि मन,एकर कोरा में आइस -2 इही माटी में खेलकूद के, जीवन सफल बनाइस करीस तपस्या कतको झन ह-2,कैसे जाबो भूल मोर छत्तीसगढ़ के ---------------------------------। इंहा के बेटा बड़े सबूत हे,मेहनत करके खाथे-2 धरती दाई के सेवा करके, धान ल उपजाथे हरियर हरियर देख के सबके-2,मन हर जाथे झूले मोर छत्तीसगढ़ के कोरा ------------------------। बड़ सीधवा हे इंहा के मनखे, लड़ई झगरा नइ जाने जाति पांति के भेद ल संगी, कभू इंहा नइ माने सबके आदर मान करत हे-2,रखते इज्जत कूल मोर छत्तीसगढ़ के कोरा में -----------------------। छत्तीसगढ़ के कोरा में संगी,छत्तीसों भाषा हाबे इंहा के जइसे भाखा बोली, अऊ कहां तै पाबे किसम किसम के भासा बोली-2,सब मिल जाथे घूल मोर छत्तीसगढ़ के कोरा ---------------------------। हीरा कस हे-------------------------------------------।। रचना महेन्द्र देवांगन माटी