Monday, 17 December 2018

जाड़ लागत हे

जाड़ लागत हे
रिमझिम रिमझिम बिहनिया ले , गिरत हावय पानी ।
कुड़कुड़ कुड़कुड़ जाड़ लागत , याद आ गे नानी ।
हाथ गोड़ जुड़ा गेहे , तापत हावन आगी ।
सांय सांय धुंका चलत , का बतावँव रागी ।
चुनुन चुनुन चुल्हा में,  भजिया ल बनावत हे ।
गरमे गरम भजिया , लइका ल खवावत हे ।
चुल्हा तीरन बइठ के , हाथ गोड़ सेंकत हन ।
बइठे बइठे टी वी मा , शपथ ग्रहण देखत हन ।

महेन्द्र देवांगन माटी
पंडरिया छत्तीसगढ़

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