Monday, 12 November 2018

कज्जल छंद

कज्जल छंद

नइहे एसो धान पान ।
रोवत हावय गा मितान ।
बूड़े करजा मा किसान ।
कइसे बचही हमर जान ।।1।।

सुक्खा हावय खेत खार ।
भुँइया मा परय दनगार ।
कइसे छुटबो अब उधार ।
माफ कर करजा सरकार ।।2।।
*********************************
लहू दान
सुन ले संगी बात मान ।
कर ले तैंहा लहू दान ।
येला सबले बड़े जान ।
बाँचे कतको के परान ।।3।।
************************************
नशा
झनकर तैंहा नशा पान ।
येला तैंहा जहर मान ।
बोले मनखे आन तान ।
जाथे कतको के परान ।।4।।
**************************************
जंगल झाड़ी अब बचाव ।
पउधा ला के सब लगाव ।
सुघ्घर दिखही सबो गाँव ।
सुरताबो गा हमन छाँव ।।5।।
********************************
बाढ़त हावय रोज घाम ।
चटचट जरथे हमर चाम ।
पाके रुख मा अबड़ आम ।
बेंचे ले गा मिलय दाम ।।6।।
********************************
पेड़ लगावव खेत खार ।
छइहाँ रइही मेड़ पार ।
सुरताबे तैं बइठ यार ।
खातू कचरा बने डार ।।7।।
*******************************
महेन्द्र देवांगन माटी
पंडरिया  (कवर्धा)
छत्तीसगढ़
8602407353
Mahendra Dewangan. Mati  @

विधान- -----
पद संख्या   --- 4
मात्रा- --- प्रत्येक पद में 14 मात्रा
तुकांत ----- चारों पद आपस में तुकांत होना चाहिए
अंत --- गुरु लघु होना चाहिए

No comments:

Post a Comment