Thursday, 16 August 2018

आबे हमर गाँव

आबे हमर गाँव  (सरसी छन्द )

आबे तैंहर गाँव हमर जी, बर पीपर के छाँव ।
देखत रइहूँ रस्ता तोरे, माटी मोरे नाँव ।।
चारों कोती हरियर हरियर , हावय खेती खार ।
गाय चरावत रहिथे भोला , बइठे तरिया पार ।।
बारी बखरी बोंथय सबझन,  लामे रहिथे नार ।
रहिथे सुघ्घर हिलमिल के सब , जुड़े मया के तार ।।
पहुना आथे घर मा कोनों,  कँउवा करथे काँव ।
सबला सकला करके दाई,  बइठे परछी छाँव ।।
लोटा मा जी पानी दे के,  पहुना पाँव पखार ।
मान गउन सब करथे ओकर, हिरदय मया अपार ।।

महेन्द्र देवांगन माटी
पंडरिया  (कवर्धा )
छत्तीसगढ़
8602407353
Mahendra Dewangan Mati

मात्रा  --- 16 + 11 = 27
सम चरण के आखिर मा बड़कू लघु  (गुरु लघु )
2 , 1 होना चाहिए ।

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