Monday, 16 July 2018

बरवै छन्द

बरवै छन्द
(1)
जंगल झाड़ी कटगे , लागय घाम ।
छँइहा के तो संगी , नइहे नाम ।
पेड़ लगावव भैया  , मिलही छाँव ।
हरियर दिखही भुँइया  , होही नाँव ।
(2)
पानी लानव संगी , बढ़िया छान ।
गंदा ला झन पीयो , लेव उबाल ।
मटकी राखव बढ़िया,  वोला ढाँक ।
घेरी बेरी  सब झन  , देखव झाँक ।
(3)
तुलसी पूजा कर ले , पानी डार ।
आशीरवाद ले ले , दीया  बार ।
तुलसी पत्ती खा ले , बिहना शाम ।
खाँसी जुड़ मिट जाथे,  मिलय अराम ।
(4)
करिया करिया हाबे , नयना तोर ।
सुध बुध ला हर लेथे , गोरी मोर ।
देखत रहिथों सपना,  मँय दिन रात ।
एक बार तैं आ जा ,  कर ले बात ।
(5)
फेंकव झन गा पानी, सबो बचाव ।
भर ले खाली मटकी,  झन बोहाव ।
पानी बिना अधूरा,  हे संसार ।
जुड़े हवय जिनगी के,  जम्मो तार ।
(6)
बोंवय बखरी बारी   , लामे नार ।
गरुवा गाय बचाये,  घेरे तार ।
निकले भांटा सेमी , बेंच बजार ।
मन मा खुशी समाये , पाय हजार ।
(7)
हावय औघड़ दानी , भोले नाथ ।
करथे जेहा पूजा,  रहिथे साथ ।
जोत जला ले तैंहा , दिल से मान ।
माँगे ले जी  देथे, सब वरदान ।
(8)
छा गे बादर संगी , अब घनघोर ।
चमके चमचम बिजुरी , नाचय मोर ।
गिरय झमा झम पानी , रेंगे धार ।
भरगे खचवा डबरा, खेती खार ।
(9)
चलो पढ़े बर जाबो,  मिलही ज्ञान ।
पढे लिखे ले मिलथे, सब सम्मान ।
पढ़बो लिखबो होही  , जग मा नाम ।
मिलजुल के हम करबो , सुघ्घर काम ।
(10)
आय किसानी दिन हा, चल ना खेत ।
नाँगर बइला सबके,  कर ले चेत ।
काड़ी कचरा बनखर,  सबला टार ।
दवई खातू माटी,  बढ़िया डार ।
(11)
राम नाम के माला  , तैंहा जाप ।
तर जाही जी चोला  , कटही पाप ।
कर ले सेवा सबके  , होही नाम ।
पाछू बर तैं जाबे , तीरथ धाम ।

लक्षण -- डाँड़ (पद) - 2 ,   चरण - 4
मात्रा -- 12 + 7 = 19
तुकांत के नियम -- दू दू डाँड़ के आखिर मा माने सम - सम चरण मा बड़कू नान्हे  (2 , 1 )
विषम चरण मा मात्रा 12
सम चरण मा मात्रा 7

महेन्द्र देवांगन माटी
पंडरिया  (कवर्धा )
छत्तीसगढ़
8602407353
Mahendra Dewangan Mati

No comments:

Post a Comment