Friday, 23 September 2016

दाई के मया

दाई के मया
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तोर मया के अंचरा में दाई, खेलेंव कूदेंव बढेंव ।
पढ़ लिख के हुसियार बनेंव, जिनगी के रसता गढेंव।

सोज रसता म तैं चलाये, कांटा कभू नइ गड़ेंव ।
मया के झूलना म तैं झुलाये, सुख के पाहड़ चढेंव।

लांघन भूखन खुद रहिके, मोला तैं खवायेस ।
जाड़ घाम अऊ पानी ले, मोला तैं बचायेस ।

खुद अड़ही रहिके दाई, मोला तैं पढायेस ।
नाम कमाबे बेटा कहिके, गोड़ में खड़ा करायेस ।

कतको दुख पीरा आइस, छाती में अपन छुपायेस
बेटी बेटा के सुख खातिर, हांस के तै गोठियायेस।

तोर मया के करजा ल, कभू उतार नइ पांवव ।
हर जनम में दाई मेंहा, तोरेच कोरा में आंवव ।
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रचना
महेन्द्र देवांगन "माटी"
गोपीबंद पारा पंडरिया
जिला -- कबीरधाम  (छ ग )
पिन - 491559
मो नं -- 8602407353
Email - mahendradewanganmati@gmail.com

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