Monday, 4 July 2016

बादर ह बदरावत हे

बादर ह बदरावत हे
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बरसा के दिन आगे संगी ,बादर ह बदरावत हे
सुरूर सुरूर हावा चलत,पेड़ सबो लहरावत हे
पुचुक पुचुक मेचका कूदे, पानी में टररावत हे
उल्हा उल्हा पाना देखके, कोयली गाना गावत हे
गडगड गडगड बादर गरजे,बछरू ह मेछरावत हे
बरसा के दिन आगे संगी, बादर ह बदरावत हे।
नांगर धर के सोनू कका, खेत डाहर जावत हे
गाडा बइला फांद के सरवन , खातू माटी लावत हे
बड़े बिहनिया ललित भैया,खातू ल बगरावत हे
बरसा के दिन आगे संगी, बादर ह बदरावत हे।
टपटप टपटप पानी गिरे, रेला घलो बोहावत हे
कूद कूद के लइका नाचे,ओरछा में नहावत हे
चिखला माटी में खेलत हाबे, दाई ह खिसयावत हे
बरसा के दिन आगे संगी, बादर ह बदरावत हे।।

रचना
महेन्द्र देवांगन माटी
8602407353
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