Wednesday, 22 June 2016

गाय अऊ कुकुर

गाय अऊ कुकुर
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एक  दिन कक्षा में मेहा लइका मन से पूछेंव के गाँव अऊ सहर में का अंतर हे बताव ? त एक झन लइका ह कथे - गाँव  में गाय पाले जाथे अऊ कुकुर मन गली में घूमत रथे ।सहर में कुकुर पाले जाथे  अऊ गाय मन गली सड़क  में  घूमत रथे ।
इही अंतर हे गुरुजी ।
वो हा भले हंसी मजाक  में बताइस  फेर  आज  के सच्चाई  उगल के रखदीस ।
जइसे जइसे आदमी मन उन्नति  करत जात हे वइसे ओकर रहन सहन अऊ खान पान ह बदलत जात हे ।
आज आदमी ह गाय के जगा कुकुर ल पोंसे ल धर लेहे ।बड़े बड़े घर में रोज कुकुर के सेवा करत हें।जतका खरचा गाय ल पोंसे में नइहे ओकर  ले जादा खरचा कुकुर के पोंसे में हे।
कुकुर ल रोज घुमाय बर लेगथे ओला नास्ता  पानी अऊ रंग रंग के खाना पीना देथे ।
अतका सेवा गऊ माता के करतीस त ओकर घर में दूध दही के गंगा बोहा जतीस ।
आज गऊ माता के बुरा हाल होगे हे।कोनो देख रेख करइया नइहे ।गाँव मन में भी चारागाह के कमी के सेती धीरे धीरे रखे बर कम करत जात हे।एकरे सेती हमर देस में दूध दही के कमी होत जात हे।
अब आदमी मन ल समझाय बर परही के अच्छा नस्ल के गाय पालो अऊ सही ढंग से देखभाल करे से बहुत फायदा हे।
गाय अऊ आदमी के संबंध ह अनादि काल से हे।एकर से हमला कई परकार के लाभ भी हो थे एला सब जानथे ।
गाय ल हम गऊ माता मानथन ।आज एकर वंश खतरा में हे।एला बचाना जरूरी हे।एकर बर गाँव  गाँव  में जागरूकता अभियान चलाना चाही ।
अब आदमी मन ल समझाय ल परही के कुकुर के जगा गाय ल पालो अऊ गऊ माता के रक्छा करो।
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लेख
महेन्द्र देवांगन माटी
(बोरसी - राजिम )
गोपीबंद पारा पंडरिया
जिला  - कबीरधाम ( छ ग )
मो•नं•- 8602407353
mahendradewanganmati@gmail.com

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