Sunday, 17 April 2016

हेलमेट

हेलमेट
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जगा जगा पुलिस वाला, फटफटी ल रोकत हे
नइ लगाहे हेलमेट वोला, भारी जुरमाना ठोंकत हे
पुलिस वाला ल देखके, रसता बदल के जावत हे
मेंड़ पार पैडगरी में, फटफटी ल कूदावत हे
पुलिस मन ल मजा होगे, रोज कमई आवत हे
जेब ह गरम होगे, आनी बानी के खावत हे
जगा जगा हेलमेट ह, भारी बेंचावत हे
दुकानदार मन खुस हे, एक के दू लगावत हे

रचना
महेन्द्र देवांगन माटी

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