Saturday, 23 January 2016

भांटा मुरई

भांटा मुरई
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आज रांधे हे घर में भांटा मुरई
लकर धकर मे होगे अधकुचरा चुरई
दाई ह चुप हे होगे बबा के चिल्लई
छोटकी ह सुसकत हे होगे करलई
सटकगे बहू के रंग रंग के बोलई
कुरिया मे खुसरके होगे रोवई
लइका ल भुलागे पियाय बर दवई
मीठ मीठ बोलके माटी के मनई
जाना हे जल्दी बाबू ल गंवई
पेट नई भरीस आजके खवई
आज रांधे हे............
रचना
महेन्द्र देवांगन माटी
बोरसी - राजिम
छत्तीसगढ़
8602407353

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