Saturday, 30 January 2016

ए भुंइहा हे सरग बरोबर

"ये भुंइहा हे सरग बरोबर"
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ये भुइंहा हे सरग बरोबर
 चंदन कस जेकर माटी हे
जंगल झाड़ी परवत नदिया
सब ह हमर थाती हे ।
हरियर हरियर लुगरा पहिने
छत्तीसगढ़ महतारी हे
खेत खार अऊ देवी देवता
हमर ये संगवारी हे ।
महानदी पैरी अऊ सोढू
अमरित कस जेकर पानी हे
तीन लोक में महिमा जेकर
गुरतुर हमर बानी हे ।
सुघ्घर बाग बगीचा जइसे
खेत के हमर कियारी हे
धान पान अऊ साग भाजी के
सुंदर लगे फूलवारी हे ।
दया मया के थरहा जागे
अइसन भांटा बारी हे
ये माटी ल माथ नवांवव
एकर महिमा भारी हे।।
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 रचना
महेन्द्र देवांगन "माटी"
( बोरसी - राजिम वाले )
गोपीबंद पारा पंडरिया
जिला - कबीरधाम (छ. ग)
पिन- 491559
मो.- 8602407353
Email -mahendradewanganmati@gmail.com
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3 comments:

  1. माटी जी आप ला गाड़ा गाड़ा जय जोहार परनाम।
    आपला आपके नवा ब्लॉग अउ अतेक सुघ्घर रचना बर बधाई हे।............

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  2. रचना पसंद करे बर बहुत बहुत धन्यवाद ईश्वर भाई ।

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  3. रचना पसंद करे बर बहुत बहुत धन्यवाद ईश्वर भाई ।

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