Monday, 12 November 2018

कज्जल छंद

कज्जल छंद

नइहे एसो धान पान ।
रोवत हावय गा मितान ।
बूड़े करजा मा किसान ।
कइसे बचही हमर जान ।।1।।

सुक्खा हावय खेत खार ।
भुँइया मा परय दनगार ।
कइसे छुटबो अब उधार ।
माफ कर करजा सरकार ।।2।।
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लहू दान
सुन ले संगी बात मान ।
कर ले तैंहा लहू दान ।
येला सबले बड़े जान ।
बाँचे कतको के परान ।।3।।
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नशा
झनकर तैंहा नशा पान ।
येला तैंहा जहर मान ।
बोले मनखे आन तान ।
जाथे कतको के परान ।।4।।
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जंगल झाड़ी अब बचाव ।
पउधा ला के सब लगाव ।
सुघ्घर दिखही सबो गाँव ।
सुरताबो गा हमन छाँव ।।5।।
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बाढ़त हावय रोज घाम ।
चटचट जरथे हमर चाम ।
पाके रुख मा अबड़ आम ।
बेंचे ले गा मिलय दाम ।।6।।
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पेड़ लगावव खेत खार ।
छइहाँ रइही मेड़ पार ।
सुरताबे तैं बइठ यार ।
खातू कचरा बने डार ।।7।।
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महेन्द्र देवांगन माटी
पंडरिया  (कवर्धा)
छत्तीसगढ़
8602407353
Mahendra Dewangan. Mati  @

विधान- -----
पद संख्या   --- 4
मात्रा- --- प्रत्येक पद में 14 मात्रा
तुकांत ----- चारों पद आपस में तुकांत होना चाहिए
अंत --- गुरु लघु होना चाहिए

Thursday, 1 November 2018

मोर छत्तीसगढ़ ( गीत)

मोर छत्तीसगढ़ महतारी हा , सरग बरोबर लागे ।
गुरतुर गुरतुर भाखा बोली , सबके मन ला भा गे ।।
मोर छत्तीसगढ़ महतारी हा .......... ................
              भेदभाव नइ जानय इँहा  ,
                सबके सेवा करथे ।
               मिल बाँट के खाथे सुघ्घर ,
                दुख पीरा ला हरथे ।
धरती दाई के सेवा खातिर, बिहना ले सब जागे ।
मोर छत्तीसगढ़ महतारी हा , सरग बरोबर लागे ।।
               आनी बानी तीज तिहार ला ,
                 मिलके सबो मनाथे ।
                ठेठरी खुरमी चीला सोंहारी ,
                   घर घर सबो बनाथे ।
गुलगुल भजिया अबड़ मिठाथे , थरकुलिया मा माँगे ।
मोर छत्तीसगढ़ महतारी हा , सरग बरोबर लागे ।।
                 सीधा सादा मनखे इँहा ,
                  गारी गल्ला नइ जानय ।
                   घर मा आथे कोनों सगा ,
                     देवता सही मानय ।
देख इँहा के रीत रिवाज ला , दुनिया भर मा छा गे ।
मोर छत्तीसगढ़ महतारी हा , सरग बरोबर लागे ।।

महेन्द्र देवांगन "माटी"
पंडरिया  (कवर्धा)
      छत्तीसगढ़
8602407353

Mahendra Dewangan. Mati @
01 / 11 / 2018

Friday, 26 October 2018

गिनती (बाल गीत)

बाल गीत
गिनती
एक चिड़िया आती है, चींव चींव गीत सुनाती है ।
दो दिल्ली की बिल्ली हैं  , दोनों जाती दिल्ली हैं ।
तीन चूहे राजा हैं  , रोज बजाते बाजा हैं ।
चार कोयल आती हैं  , मीठी गीत सुनाती हैं ।
पाँच बन्दर बड़े शैतान,  मारे थप्पड़ खींचे कान ।
छः तितली की छटा निराली , उड़ती है वह डाली डाली ।
सात शेर जब मारे दहाड़ , काँपे जंगल हिले पहाड़ ।
आठ हाथी जंगल से आये , गन्ने पत्ती खूब चबाये ।
नौ मयूर जब नाच दिखाये , सब बच्चे तब ताली बजाये ।
दस तोता जब मुँह को खोले , भारत माता की जय जय बोले ।

महेन्द्र देवांगन "माटी"
पंडरिया  (कवर्धा)
छत्तीसगढ़
8602407353
Mahendra Dewangan Mati @

Thursday, 18 October 2018

असली रावण मारो

असली रावण मारो
गली गली रावण घूमत हे , ओकर भुररी बारो ।
नकली रावण छोड़ो संगी , असली रावण मारो ।।
रोज करत हे अत्याचारी , आँखी ला देखाथे ।
करथे दादागीरी अब्बड़ , तलवार ला उठाथे ।।
हिम्मत करके आघू आवव , मिलके सब ललकारो ।
नकली रावण छोड़ो संगी , असली रावण मारो ।।
जुंवा चित्ती सटटा मटका , रोज अबड़ खेलाथे ।
गाँव गाँव मा दारु बेंच के , पइसा अबड़ कमाथे ।।
दिखत हवय गा साव बरोबर , आँखी अपन उघारो ।
नकली रावण छोड़ो संगी , असली रावण मारो ।।
बेटी माई हरण करत हे , इज्जत रोज लूटथे ।
पर के सुख ला देख नइ सकय , ओकर आँख फूटथे ।।
अइसन पापी रावण मन ला , आगी मा अब डारो ।
नकली रावण छोड़ो संगी , असली रावण  मारो ।।

महेन्द्र देवांगन माटी
पंडरिया छत्तीसगढ़
Mahendra Dewangan Mati
19/10/2018

Monday, 15 October 2018

माँ

माँ

मंदिर में तू पूजा करके,  छप्पन भोग लगाये ।
घर की माँ भूखी बैठी है , उसको कौन खिलाये ।
कैसे तू नालायक है रे , बात समझ ना पाये ।
माँ को भूखा छोड़ यहाँ पर , दर्शन करने जाये ।।
भूखी प्यासी बैठी है माँ , दिनभर कुछ ना खाये ।
मांगे जब वह पानी तो फिर , क्यों उसपर झल्लाये ।।
करे दिखावा कितना देखो , मंदिर  चुनर चढ़ाये ।
घर की माई साड़ी मांगे , उसको तो धमकाये ।।
पाल पोसकर बड़ा किया जो , उस पर तरस न खाये ।
भूल गये संस्कारों को सब , लज्जा भी ना आये ।।
कैसे  होगी खुश अब माता,  अपने दिल से बोलो ।
पछताओगे तुम भी बेटा ,  आँखें अब तो खोलो ।।

महेन्द्र देवांगन माटी
पंडरिया छत्तीसगढ़
8602407353

Mahendra Dewangan Mati

सार छंद
16 + 12 = 28 मात्रा
पदांत --- 2 लघु या 1 गुरु

दीप जलाने आया हूँ

दीप जलाने आया हूँ
(ताटंक छंद)

दुर्गा माता के चरणों में  , दीप जलाने आया हूँ ।
चूड़ी कंगन रोली टीका , चुनरी फीता लाया हूँ ।।
दूर दूर से दर्शन करने  , श्रद्धालू सब आते हैं ।
माता जी के चरणों में सब , श्रद्धा सुमन चढ़ाते हैं ।।
मनोकामना पूरी करती , जो मांगो दे देती है ।
बड़ी दयालू माता जी है  ,  संकट सब हर लेती है ।।
मैं बालक तू माता मेरी  , द्वार तुम्हारे आया हूँ ।
माटी का मैं दीप जलाकर  , काव्य पुष्प ये लाया हूँ ।।
ध्यान किया मैं जब जब माता,  अपने दिल में पाया हूँ ।
चूड़ी कंगन रोली टीका , चुनरी फीता लाया हूँ ।।

महेन्द्र देवांगन माटी
पंडरिया (कवर्धा)
छत्तीसगढ़
8602407353
Mahendra Dewangan Mati @

ताटंक छंद
16 + 14 = 30 मात्रा
पदांत ---- 3 गुरु अनिवार्य

 

Saturday, 13 October 2018

माँ की ममता

माँ की ममता
(सार छंद)

माँ की ममता होती प्यारी  , कोई जान न पाये ।
हर संकट से हमें बचाती , उसकी सभी दुआएँ ।।1।।

पल पल नजरें रखती है वह , समझ नहीं हम पाते ।
टोंका टांकी करती है जब , हम क्यों गुस्सा जाते ।।2।।

भूखी प्यासी रहकर भी माँ , हमको दूध पिलाती ।
सभी जिद्द वह पूरा करती , राह नया दिखलाती ।।3।।

सर्दी गर्मी बरसातों में , हर पल हमें बचाती ।
बुरी नजर ना लगे लाल को , आँचल से ढँक जाती ।।4।।

बड़े हुए जब बच्चे देखो , सपने सारे तोड़े ।
भूल गए उपकारों को अब , माँ से मुँह को मोड़े ।।5।।

हुए गुलाम बहू का देखो , माता बोझा लागे ।
बेटा जो नालायक निकला , कर्तव्यों से भागे ।।6।।

सिसक रही है माँ की आत्मा , कोने में है रोती ।
किस कपूत को जाया है वह , आँसू से मुँह धोती ।।7।।

जो करते अनदेखा माँ को , कभी नहीं सुख पाते ।
घूमता है जब चक्र समय का , जीवन भर पछताते ।।8।।

माँ तो ममता की मूरत है  , कभी नहीं कुछ लेती ।
गिरकर देखो चरणों में तुम  , माफी सब कर देती ।।9।।

*माटी* करते सबसे विनती ,  माँ को ना तड़पाओ ।
रखो प्रेम से ह्दय माँ को  , घर को स्वर्ग बनाओ ।।10।।

महेन्द्र देवांगन माटी
पंडरिया छत्तीसगढ़
8602407353
Mahendra Dewangan Mati

सार छंद- -- 16 + 12 =28 मात्रा
पदांत -- 2 लघु  या  1 गुरु