Wednesday, 19 September 2018

बरखा रानी

बरखा रानी
( सार छंद )

झूम रहे सब पौधे देखो , आई बरखा रानी ।
मौसम लगते बड़े सुहाने , गिरे झमाझम पानी ।।1।।

हरी भरी धरती को देखो , हरियाली है छाई ।
बाग बगीचे दिखते सुंदर,  मस्ती सब में  आई ।।2।।

कलकल करती नदियाँ बहती  , झरने शोर मचाये ।
मोर नाचते वन में देखो , कोयल गाना गाये ।।3।।

बादल गरजे बिजली चमके , घटा घोर है छाई ।
सौंधी सौंधी माटी महके , बूंद पड़े जब भाई ।।4।।

खेत खार में झूम झूम कर , फसलें सब लहराये ।
हैं किसान को खुशी यहाँ पर ,  "माटी" गीत सुनाये ।।5।।

महेन्द्र देवांगन माटी
पंडरिया ( कवर्धा)
छत्तीसगढ़
mahendradewanganmati@gmail.com

Wednesday, 5 September 2018

गुरु (दोहे )

गुरु

गुरू बिना मिलथे कहाँ,  कोनों ला जी ज्ञान ।
कर ले कतको जाप तैं , चाहे देदव जान ।।1।।

नाम गुरू के जाप कर , तैंहा बारम्बार ।
मिलही रस्ता ज्ञान के  , होही बेड़ापार ।।2।।

छोड़व झन अब हाथ ला , रस्ता गुरु देखाय ।
दूर करय अँधियार ला , अंतस दिया जलाय ।।3।।

सेवा करले प्रेम से  , एहर जस के काम ।
गुरु देही आशीष तब , होही जग मा नाम ।।4।।

पारस जइसे होत हे , सदगुरु के सब ज्ञान ।
लोहा सोना बन जथे , देथे जेहा ध्यान ।।5।।

देथे शिक्षा एक सँग,  गुरुजी बाँटय ज्ञान ।
कोनों कंचन होत हे , कोनों काँच समान ।।6।।

सत मारग मा रेंग के  , बाँटव सब ला ज्ञान ।
गुरू कृपा ले हो जथे  , मूरख भी विद्वान ।।7।।

शिक्षक के आदर करव , पूजव सबो समाज ।
राह बताथे ज्ञान के  , तब होथे सब काज ।।8।।

शिक्षा जेहा देत हे , वोहर गुरू समान ।
माथ नवावँव पाँव मा , असली गुरु तैं जान ।।9।।

आखर आखर जोड़ के  , बाँटय सब ला ज्ञान ।
मूरख बनय सुजान जी  , अइसन गुरू महान ।।10।।

महेन्द्र देवांगन माटी
पंडरिया (कवर्धा )
छत्तीसगढ़
8602407353

Mahendra Dewangan Mati @

Monday, 3 September 2018

किशन कन्हैया

किशन कन्हैया

छन्न पकैया पकैया  , नाचे किशन कन्हैया ।
गोप ग्वाल सब ताली पीटे,  नाचत ताता थैया ।।1।।
छन्न पकैया छन्न पकैया  , मुरली मधुर बजाये ।
बंशी के धुन सुन के भैया  , राधा दौड़त आये ।।2।।
छन्न पकैया छन्न पकैया  , गइया रोज चराये ।
एती ओती गइया भागे , छेंक छेंक के लाये ।।3।।
छन्न पकैया छन्न पकैया  , गोप ग्वाल सब आये ।
चुपके चुपके घर मा जाके  , माखन मिश्री खाये ।।4।।
छन्न पकैया छन्न पकैया  , मोहन खावय रोटी ।
उड़ के आथे कौवा संगी , धर के लेगे बोटी ।।5।।
छन्न पकैया छन्न पकैया  , पुक खेले बर जाये ।
एक लात जब कस के मारे  , यमुना मा फेंकाये ।।6।।
छन्न पकैया छन्न पकैया  , यमुना अब्बड़ गहरा ।
शेषनाग हा बइठे हावय , देवत वोहा पहरा ।।7।।
छन्न पकैया छन्न पकैया  , शेषनाग फुफकारे ।
जाके यमुना भीतर मोहन  , कूद कूद के मारे ।।8।।
छन्न पकैया छन्न पकैया  , मटकी सबके फोड़े ।
मुसकिल होगे जाना संगी  , कोनों ला नइ छोड़े ।।9।।
छन्न पकैया छन्न पकैया  , मोहन रास रचाये ।
ग्वाल बाल अउ राधा नाचय , अबड़ मजा जी पाये ।।10।।

महेन्द्र देवांगन माटी
पंडरिया छत्तीसगढ़
@Mahendra Dewangan Mati

बाल कृष्ण

बाल कृष्ण 
( सार छन्द में )

बाल कृष्ण के लीला भारी , बोले नटवर लाला ।
राधा क्यों गोरी है मैया , मैं क्यों बिल्कुल काला ।।
बात अजब सुनकर के मैया , मंद मंद मुस्काये ।
ऐसे क्यों कहता है लल्ला , तुमको क्यों बतलाये ।।
मोहन बोले सुन ले मैया , आज मुझे बतलाओ ।
रुठ जाऊँगा अब मैया मैं,  पास नहीं तुम आओ ।।
सुन मोहन के बात यशोदा , उसको गले लगाई ।
क्यों काला है सुन ले लल्ला,  आज उसे बतलाई ।।
बंदीगृह में जन्म लिया है , तू है किस्मत वाला ।
अँधियारी में आया है तू , इसीलिए है काला ।।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ

महेन्द्र देवांगन माटी
पंडरिया  (कवर्धा )
छत्तीसगढ़
Mahendra Dewangan Mati

मात्रा ---- 16 +12 =28

Saturday, 1 September 2018

भोर हुआ

भोर हुआ
( सार छन्द में )

भोर हुआ सूरज उग आया,  चिड़ियाँ पाँखे खोले ।
छत के ऊपर आ बैठी है,  चींव चींव वह बोले ।।
सरसर सरसर हवा चली है, मौसम हुआ सुहाना ।
फूलों से खुशबू जब आये, भौंरा गाये गाना ।।
उड़ती तितली बागों में अब ,  फूलों पर मँडराये ।
भाँति भाँति के फूल खिले हैं, सबके मन को भाये ।।
कोठे पर बैठी है गैया , बछड़ा भी रंभाये ।
रावत भैया दूध दूहने,  बाल्टी लेकर जाये ।।
माटी की खुशबू को देखो , सबके मन को भाये ।
आओ प्यारे इस माटी को , माथे तिलक लगायें ।।

महेन्द्र देवांगन माटी
पंडरिया (कवर्धा )
छत्तीसगढ़
Mahendra Dewangan Mati

Thursday, 30 August 2018

पर्यावरण दोहे

पर्यावरण

पेड़ लगाओ मिल सभी,  देते हैं जी  छाँव ।
शुद्ध हवा सबको मिले  , पर्यावरण बचाव ।।1।।

पेड़ों से मिलती हमें , लकड़ी फल औ फूल ।
गाँव गली में छोरियाँ  , रस्सी बाँधे झूल  ।।2।।

पर्यावरण विनाश से,  मरते हैं सब लोग ।
कहीं बाढ़ सूखा कहीं,  जीव रहे हैं भोग ।।3।।

जब जब काटे वृक्ष को , मिलती उसकी आह ।
भुगत रहे प्राणी सभी  , ढूँढ रहे हैं राह ।।4।।

सड़क बनाते लोग हैं  , वृक्ष रहे हैं काट ।
पर्यावरण विनाश कर , देख रहे हैं बाट ।।5।।

पानी डालो रोज के  , पौधे सभी बचाव ।
मत काटो तुम पेड़ को , मिलजुल सभी लगाव ।।6।।

पंछी बैठे डाल में  , फुदके चारों ओर ।
चींव चींव करते सभी  , होते ही वह भोर ।।7।।

पेड़ों से मिलती हवा , श्वासों का आधार ।
कट जाये यदि पेड़ तो  , टूटे जीवन तार ।।8।।

माटी में मिलते सभी  , सोना चाँदी हीर ।
पर्यावरण बचाय के  , समझो माटी पीर ।।9।।

दो दिन की है जिंदगी  , समझो इसका मोल ।
माटी बोले प्रेम से  , सबसे मीठे बोल ।।10।।

महेन्द्र देवांगन "माटी"
पंडरिया  (कवर्धा )
छत्तीसगढ़
8602407353
@Mahendra Dewangan Mati
30/08/2018

Tuesday, 28 August 2018

गेंड़ी

छन्न पकैया छन्न पकैया, सावन आ गे भइया ।
हरियर हरियर चारों कोती, चरे घास ला गइया ।।

छन्न पकैया छन्न पकैया,  कर ले नाँगर पूजा ।
मया प्रेम ला राखे रहिबे, झन करबे तैं दूजा ।।

छन्न पकैया छन्न पकैया,  लइका चढहे गेड़ी ।
रिच्चिक रिच्चिक बाजत हावय , मचय उठा के एड़ी ।।

छन्न पकैया छन्न पकैया,  घर घर खोंचय डारा ।
बइगा मन हा घूमत संगी , ए पारा वो पारा ।।
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   मात्रा ---- 16 + 12 = 28
ये हर सार छन्द के एक किसम हरे । येमा "छन्न पकैया छन्न पकैया" एक टेक बरोबर शुरु मा आथे ।
बाकी सब नियम सार छन्द के लागू होथे ।

महेन्द्र देवांगन माटी
पंडरिया  (कबीरधाम )
छत्तीसगढ़
8602407353
@Mahendra Dewangan Mati