Tuesday, 20 August 2019

तीजा - पोरा के तिहार


तीजा - पोरा के तिहार

छत्तीसगढिया सब ले बढ़िया । ये कहावत ह सिरतोन मा सोला आना सहीं हे । इंहा के मनखे मन ह बहुत सीधा साधा अउ सरल विचार के हवे । हमेशा एक दूसर के सहयोग करथे अउ मिलजुल के रहिथे । कुछु भी तिहार बार होय इंहा के मनखे मन मिलजुल के एके संग मनाथे ।

छत्तीसगढ़ ह मुख्य रुप ले कृषि प्रधान राज्य हरे । इंहा के मनखे मन खेती किसानी के उपर जादा निर्भर हे । समय - समय मा किसान मन ह अपन खुशी ल जाहिर करे बर बहुत अकन तीज - तिहार मनावत रहिथे ।
खेती किसानी के तिहार ह अकती के दिन ले शुरू हो जाथे । अकती के बाद में हरेली तिहार मनाथे । फेर ओकर बाद पोरा तिहार मनाय जाथे ।

पोरा तिहार  ---- पोरा पिठोरा ये तिहार ह घलो खेती किसानी से जुड़े तिहार हरे ।येला भादो महीना के अंधियारी पाँख ( कृष्ण पक्ष) के अमावस्या के दिन मनाय जाथे ।
ये तिहार ल विशेष कर छत्तीसगढ़,  मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र अउ कर्नाटक मा जादा मनाय जाथे ।

पोरा काबर मनाय जाथे ---- पोरा तिहार मनाय के पाछु एक कहावत ये भी हावय के भादो माह (अगस्त)  में खेती किसानी के काम ह लगभग पूरा हो जाय रहिथे । धान के पौधा ह बाढ़ जाय रहिथे । धान ह निकल के ओमे दूध भराय के शुरु हो जाथे । या हम येला कहि सकथन के अन्न माता ह गर्भ धारण करथे । इही खुशी मा किसान मन ह पोरा के तिहार ल धूमधाम से मनाथे ।

बइला के पूजा  ------ खेती किसानी बर सब ले उपयोगी पशु बइला हरे । बइला के बिना खेती के काम अधुरा हे । ये पाय के किसान मन ह आज के दिन बइला ल बढ़िया तरिया नदियाँ मा  नउहा के साफ सुथरा करथे अउ ओकर पूजा करथे ।
ये दिन बइला ल बहुत सुघ्घर ढंग ले सजाय जाथे । ओकर सींग मा पालिस लगाय जाथे । घेंच मा घाँघरा पहिनाय जाथे अउ किसम - किसम के फूल माला पहिना के सजाय जाथे ।

प्रतियोगिता के आयोजन  ------ पोरा तिहार के दिन गाँव अउ शहर सबो जगा किसम - किसम के प्रतियोगिता भी रखे जाथे । कोनों जगा बइला दौड़ के प्रतियोगिता त कोनों जगा बइला सजाय के प्रतियोगिता रखे जाथे । गाँव के मन ह एकर खूब आनंद उठाथे ।

माटी के बइला ----- ये दिन घरो घर मा लइका मन बर माटी या कठवा के बइला बजार ले खरीद के लाय जाथे । पहिली येकर घर मा विधि विधान से पूजा करे जाथे । ताहन लइका मन ये बइला ल खूब खेलथे । लइका मन भी एकर प्रतियोगिता रखथे अउ मजा लेथे ।

चुकी पोरा ----- टूरा (लड़का)  मन ह माटी के बइला ल खेलथे त  टूरी (लड़की ) मन ह चुकी पोरा खेलथे ।
चुकी पोरा मा खाना बनाय के जम्मो समान ह रहिथे ।
जइसे  -- चुल्हा , कराही,कलछुल,तोपना,तावा,चिमटा,जांता अउ सबो प्रकार बरतन रहिथे । येला लड़की मन ह मन लगा के खेलथे ।

बेटी-  बेटा बर पूजा ------ पोरा तिहार के दिन सबोझन अपन - अपन घर मा चौसठ योगिनी अउ पशुधन के पूजा करथे । जेमे अपन संतान के लंबा उमर के कामना करे जाथे ।

आनी बानी के पकवान ---- आज के दिन घर -घर मा आनी- बानी के पकवान बनाये जाथे । छत्तीसगढ़ मा चीला, चौसेला, ठेठरी, खुरमी, गुझिया, बरा, सोंहारी, खीर -पुरी, गुलगुला भजिया अइसे किसम - किसम के पकवान बनाय जाथे अउ मिल बाँट के खाय जाथे ।

तीजा के तिहार- -------- भादो महीना मा अंजोरी पाँख (शुक्ल पक्ष) के तीसरा दिन तीजा के तिहार मनाय जाथे । छत्तीसगढ़ मा तीजा के तिहार ल माइलोगिन (औरत) मन बहुत ही धूमधाम से मनाथे । ये समय सबो दीदी बहिनी मन मइके मा आय रहिथे अउ अपन पति के लंबा उमर बर उपास रहिथे ।
दूसर दिन किसम - किसम के पकवान फल फूल अउ कतरा खा के फरहार करथे ।
तीजा के दिन सबो महिला मन नवा - नवा लुगरा पहिनथे अउ खेलकूद भी करथे ।

ये प्रकार से तीजा - पोरा के तिहार ल बहुत ही धूमधाम अउ उत्साह के मनाय जाथे । येकर से गाँव मा एक दूसर से मेलजोल बढथे अउ भाईचारा के भावना प्रगट होथे ।

लेखक
महेन्द्र देवांगन माटी
पंडरिया  (कवर्धा) 
8602407353
Mahendra Dewangan Mati

Saturday, 17 August 2019

तोर सपना


तोर सपना
(गीतिका छंद  - श्रृंगार रस )

देख तोला आज मोरे , मन मचल अब जात हे ।
रात दिन गुनत रहिथौं मँय , तोर सपना आत हे ।।

डार खोपा रेंगथस तैं , मोंगरा ममहात हे ।
देख के भौंरा घलो हा , तोर तीर म आत हे ।।

आँज के काजर ल तैंहा , बाण हिरदे मारथस ।
गाल होथे लाल तोरे , खिल खिला के हाँसथस ।।

काय जादू डार दे हस , तोर सुरता आत हे ।
देखथँव मँय जेन कोती , चेहरा झुल  जात हे

रचनाकार
महेन्द्र देवांगन माटी
पंडरिया छत्तीसगढ़
17/08/2019

( छत्तीसगढ़ी भाषा में)

कम परिवार सुखी परिवार


कम परिवार सुखी परिवार
( चौपाई छंद)

जेकर जादा लइका होवय । घेरी बेरी वोहर रोवय ।।
पइसा कौड़ी कुछु नइ बाँचय । मुड़ मा चढ़ के लइका नाचय ।।

एक कमइया चार खवइया । कइसे बाँचय पइसा भैया ।
होवत हावय ताता थैया । कइसे पार लगावे नैया ।।

रोज रोज के झगरा होवय । घर में दाई अब्बड़ रोवय ।।
सिरतो कहिथों नोहय ठठ्ठा । मुड़ के येहा भारी गट्ठा ।।

माटी के गा कहना मानव । कम लइका के महिमा जानव ।।
कम परिवार सुखी हे जादा । नइ आवय काँही जी बाधा ।।

रचनाकार
महेन्द्र देवांगन माटी
पंडरिया छत्तीसगढ़
17/08/2019
( छत्तीसगढ़ी भाषाा में) 



Wednesday, 31 July 2019

आ गे हरेली तिहार


आ गे हरेली तिहार  (गीत)

आगे आगे हरेली तिहार जी संगी , जुरमिल सबे मनाबो ।
नांगर बइला के पूजा करबो , चाँउर के चीला चढाबो ।।
आगे आगे हरेली तिहार ..............................

हरियर हरियर दिखत हे भुइयाँ ,खेती खार लहराये ।
छलकत हावय नदियाँ तरिया,  सबे के मन ला भाये ।।
छत्तीसगढ़ के सुघ्घर माटी,  माथे तिलक लगाबो ।
आगे आगे हरेली तिहार ..................... ..........

नांगर बक्खर के पूजा करबो , गरुवा ल लोंदी खवाबो ।
राउत भैया मन राखे रहिथे , दसमूल कांदा खाबो ।।
हरियर हरियर लीम के डारा , घर घर आज लगाबो ।
आगे आगे हरेली तिहार ................................

बरा सोंहारी ठेठरी खुरमी , चीला के भोग लगाबो ।
खो खो कबड्डी फुगड़ी बिल्लस , सब्बो खेल खेलाबो ।।
लइका मन सब गेड़ी मचही , सबझन खुशी मनाबो ।
आगे आगे हरेली तिहार .................................

गीतकार
महेन्द्र देवांगन माटी
पंडरिया छत्तीसगढ़
8602407353
Mahendra Dewangan Mati


नाग पंचमी


" नागपंचमी " के तिहार

हिन्दू समाज में देवी - देवता के पूजा करे के साथ - साथ पशु - पक्षी अऊ पेंड़ - पौधा के भी पूजा  करे  के  रिवाज हे । सब जीव - जन्तु उपर दया करना हिन्दू समाज के परम्परा हरे । उही परंपरा के अंतर्गत हमर समाज में सांप के भी पूजा करे जाथे ।
सावन महीना के अंजोरी पाँख के पंचमी के दिन नाग देवता के पूजा करे जाथे । ये दिन नाग पंचमी के रूप में मनाये जाथे । नाग पंचमी के दिन गाँव - गाँव में विशेष उत्साह रहिथे । ये दिन धरती ल खोदना मना रहिथे । आज के दिन नाग देवता ल दूध पियाय के परंपरा हे । एकर पहिली माटी के नाग देवता या चित्र बनाके ओकर पूजा करे जाथे ।
नारियल, धूप , अगरबत्ती जलाके दूध चढ़ाये जाथे अऊ कोनो परकार के हानि मत पहुंचाय कहिके विनती करे जाथे ।

आज के दिन गाँव - गाँव में कुसती प्रतियोगिता होथे । जेमे आसपास के बड़े - बड़े पहलवान मन आके अपन दांव पेंच देखाथे , अऊ वाहवाही लूटथे ।

हमर देश ह कृषि प्रधान देश हरे । खेत मन में सांप ह  रहिथे अऊ जीव - जन्तु ,  मुसवा आदि मन फसल ल नुकसान पहुंचाथे ओकर से भी रकछा करथे ।
एकरे पाय एला छेत्रपाल भी  कहे जाथे ।

साप ह बिना कारन के कोनो ल नइ काटे । जेहा ओला नुकसान पहुंचाथे या मारे के कोशिश करथे उही ल काटथे अइसे कहे जाथे ।

नाग पंचमी के एक पौराणिक कथा हाबे ।
एक किसान अपन परिवार सहित राहत रहिस । ओकर दू बेटा अऊ एक बेटी  रहिस । एक दिन किसान ह अपन खेत में नांगर जोतत रहिस त माटी के नीचे दबे सांप के तीन ठन पिला ह मरगे । अपन पिला मन ल मरे देखके नागिन ह बहुत दुखी होइस अऊ बदला लेके ठान लीस ।
रात कुन जब किसान के पूरा परिवार सुते रहिस त नागिन ह आके किसान ओकर बाई अऊ दूनो बेटा  ल चाब के भागगे ।

 ओकर बाद दूसर दिन नागिन ह जब लड़की ल चाबे बर आइस त लड़की ह ओला देख डरिस अऊ दूध के कटोरा ल ओकर आघू में मढ़ा दीस अऊ हाथ जोड़ के छमा मांगिस ।

 ओकर कलपना ल देखके नागिन ल दया आगे अऊ खुश होके वरदान मांगे ल बोलीस । त लड़की ह अपन दाई ददा अऊ दूनो भाई ल जिंदा करें के वर मांगिस । त नागिन ह तथास्तु कहिके जिंदा कर दीस ।

वो दिन से पंचमी के दिन नाग पूजा  करे के परंपरा चलगे । आज के दिन खेत में कोनो नांगर नइ चलायें अउ जमीन ल भी नइ खोदे ।
आज के दिन जेहा सच्ची श्रध्दा भक्ति से नाग देवता के पूजा करथे ओला नाग देवता के आशीरवाद मिलथे अऊ ओला सांप ह नइ काटे ।
जय नाग देवता।
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लेख
महेन्द्र देवांगन "माटी"
गोपीबंद पारा पंडरिया
जिला-- कबीरधाम ( छ. ग )
मो.- 8602407353

Mahendra Dewangan Mati


Tuesday, 30 July 2019

शिव शंकर


शिव शंकर

शिव शंकर ला मान लव , महिमा एकर जान लव ।
सबके दुख ला टार थे , जेहा येला मान थे ।।

काँवर धर के जाव जी  , बम बम बोल लगाव जी ।
किरपा ओकर पाव जी  , पानी खूब चढ़ाव जी ।।

तिरशुल धर थे हाथ में  , चंदा चमके माथ में ।
श्रद्धा रखथे नाथ में  , गौरी ओकर साथ में ।।

सावन महिना खास हे , भोले के उपवास हे ।
जेहर जाथे द्वार जी  , होथे बेड़ा पार जी ।।

महेन्द्र देवांगन "माटी"  (शिक्षक)
पंडरिया  (कबीरधाम)
छत्तीसगढ़
8602407353
mahendradewanganmati@gmail.com

Tuesday, 23 July 2019

अण्डा के फण्डा



अण्डा के फण्डा ( Egg )

कोनो खावत सेव केरा , कोनो अण्डा खावत हे ।
लइका मन हा मगन होके , रोज स्कूल जावत हे ।।

कोनों ह विरोध करत , कोनों ह खवावत हे ।
असमंजस मे हे सरकार ह , मिटिंग में बलावत हे ।।

कोनों काहत बंद करव , कोनों गुण ल गावत हे ।
लइका मन ह मगन होके , रोज स्कूल जावत हे ।।

गुरुजी मन घेरी बेरी , पालक के घर जावत हे ।
अण्डा चाही के केरा चाही , सहमति ल लिखावत हे ।।

राजनीति के फण्डा मा  , अण्डा ह उबलावत हे ।
लइका मन ह मगन होके , रोज स्कूल जावत हे ।।

पहिली के जमाना ह , अब्बड़ सुरता आवत हे ।
पहिली कापी में मिले अंडा , अब थारी में आवत हे ।।

अब पढ़े ल नइ आय तभो , मुरगा नइ बनावत हे ।
लइका मन ह मगन होके , रोज स्कूल जावत हे ।।

महेन्द्र देवांगन माटी
पंडरिया कबीरधाम
      छत्तीसगढ़
8602407353
Mahendra Dewangan Mati