Wednesday, 23 January 2019

नेताजी

नेताजी 
देश हमर आजाद करे बर , नेताजी हा आइस ।
वंदे मातरम जय हिन्द के  , नारा खूब लगाइस ।।
तुमन लहू ला देवव मिल के , आजादी मँय देहूँ ।
मार मार के गोरा मन ला , बदला मँय हा लेहूँ ।।
गाँव शहर मा घूम घूम के , सब में जोश जगाइस।
आजादी ला पाये खातिर  , गीत नवा सब गाइस ।।

वंदे मातरम 

नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती के हार्दिक शुभकामना अउ बधाई 

महेन्द्र देवांगन माटी 
पंडरिया छत्तीसगढ़ 
8602407353
Mahendra Dewangan Mati 

Tuesday, 22 January 2019

योग करो

योग करो
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योग करो सब यो
ग करो।
सुबह शाम योग करो।।
योग करो सेहत बनाओ ।
ताजा ताजा फल को खाओ।।
योग करो सब योग करो।
सुबह उठ कर दौड़ लगाओ।।
शुद्ध ताजा हवा को पाओ।।
जूस पीओ और फल फूल खाओ।
शरीर को सब स्वस्थ बनाओ।।
योग करो सब योग करो।
सुबह शाम सब योग करो।।

प्रिया देवांगन " प्रियू"
पंडरिया 
जिला - कबीरधाम  (छत्तीसगढ़)

गऊ माता ला बचाव



गऊ माता ला बचाव

             गाय ह एक पालतू जानवर हरे । येला हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई अऊ संसार में जतका धरम हे , सब धरम के आदमी मन येकर पालन पोसन करथे ।
काबर कि गाय से बहुत आमदनी भी  होथे ।
गाय ही एक अइसे जानवर हरे जेहा जीयत में तो काम आथे,  अऊ मरे के बाद भी एकर चमड़ा अऊ हड्डी तक ह काम आथे ।
हर प्रकार  के उपयोगी होय के कारन हिन्दू धरम में येला गऊ माता कहे जाथे ।
गाय ल संसार के सबो देश में पाले जाथे ।

भोजन --- गाय ह शुद्ध  शाकाहारी हरे। एहा घास,भूसा, पैरा, अऊ पेड़ पऊधा के पत्ती ल खाथे ।

नस्ल --- भारत में गाय के 30 प्रकार के नस्ल पाय जाथे ।
जइसे -- देसी, सिंधी, साहिवाल, गिर, देवनी,  हरियानवी आदि ।
सब नस्ल के गाय ह अलग अलग मात्रा में दूध देथे ।
गाय के दूध ह बहुत उपयोगी अऊ गुनकारी होथे ।एहा कई प्रकार  के बीमारी से बचत करथे ।
              गाय के दूध बेचे से बहुत आमदनी होथे । गाय के दूध से दही, मही, मक्खन, घीव, मिठाई आदि बनाय जाथे ।

खेती के काम ---- गाय के पिला ल बछरु कहे जाथे । बछरु ह बड़े होके बइला बनथे । बइला ह खेती किसानी के काम आथे ।
हमर देस ह कृषि प्रधान  देश हरे । एकर सेती बइला के बहुत महत्व हे । बइला के माध्यम से ही किसान अपन खेती के काम ल पूरा करथे ।

          गऊ माता के हर चीज ह उपयोगी होथे । एकर गोबर से छेना बनाय जाथे । जेहा चूल्हा जलाय के काम आथे ।
गाय के पेसाब भी बहुत उपयोगी होथे । एला पीये से शरीर  स्वस्थ अऊ निरोग रहिथे ।

धारमिक महत्व ---- गाय के धारमिक, आध्यात्मिक अऊ वैज्ञानिक महत्व भी बहुत हे।
गाय ल एक पवित्र पशु माने गेहे।
भगवान श्री कृष्ण के जीवन में भी गाय के बहुत महत्व रिहिसे । वो बचपन में गाय चराय बर जाय अऊ हमेशा गऊ माता के सेवा करे।
गाय के शरीर में तैंतीस कोटि देवी देवता के निवास माने जाथे ।
एकरे सेती हिन्दू मन एकर पूजा करथे ।

वैज्ञानिक मन भी माने हे कि गाय के घीव से हवन करे ले आसपास के कीटानु मन मर जाथे अऊ वातावरन ह शुद्ध  हो जाथे ।
एकर गोबर में भी बहुत शक्ति हे। गोबर में घर दुवार अंगना ल लीपे से कीटानु मन मर जाथे अऊ वो जगा ह पवित्र हो जाथे ।

गौसाला --- भारत में जगा जगा गौसाला भी बनाय गेहे ।जेमे गाय ल पालथे अऊ ओकर दूध दही ल बेच के आमदनी प्राप्त करथे ।
ए प्रकार से हम कहि सकथन कि गाय ह हमर लिए बहुत उपयोगी अऊ लाभकारी हे ।
एकर सेवा करे से सुख शांति अऊ समृद्धि बढ़थे ।

गऊ माता ल बचाना जरूरी हे ------ आजकाल गाय पालन में कमी आत जात हे । जइसे जइसे आदमी तरक्की करत जावत हे, वइसे वइसे पशुधन में कमी होवत जात हे।
अब आदमी मन ह खेती किसानी बर टेक्टर, हारवेसटर आदि यंत्र के उपयोग करे ल धर लेहे ।
आजकल शहर मन में गाय के बहुत जादा दुरदसा देखे बर मिलथे ।

कतको आदमी मन अपन गाय ल बांध के नइ रखे अऊ खुल्ला छोड़ दे रहिथे । गाय मन ह बजार में अऊ सड़क में घूमत रहिथे । एकर से आने जाने वाला मन ल भी बहुत परेशानी के सामना करे ल परथे ।
कतको गाय ह मोटर गाड़ी में दुरघटना के सिकार हो जथे अऊ बेमौत मारे जाथे ।
एहा बहुत चिंतनीय बिसय हरे।
गऊ माता ल बचाना बहुत जरूरी हे ।
गऊ माता के महत्व ल फिर से समझे ल परही अऊ गौ वंश ल बढाय बर एक बार फिर से अभियान चलाय बर परही ।

जय गऊ माता ।

लेखक
महेन्द्र देवांगन माटी
पंडरिया छत्तीसगढ़
8062407353

Mahendra Dewangan Mati
Gopiband para Pandaria
Dist- - Kabirdham
chhattisgarh

mahendradewanganmati@gmail.com




Monday, 21 January 2019

गीतिका छंद

गीतिका छंद

1
मान ले तैं बात संगी , झूठ कहना छोड़ दे ।
नाम होही तोर जग मा , पाप ले मुँह मोड़ दे ।
दान कर ले रोज के तैं , दीन दुखिया जान के ।
मीठ बानी बोल ले तैं , आज रिश्ता मान के ।
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2
ज्ञान के भंडार भर दे , शारदे माँ आज तैं ।
हाथ जोंड़व पाँव परके , राख मइयाँ लाज तैं ।
कंठ बइठो मातु मोरे , गीत गाँवव राग मा ।
होय किरपा तोर माता,  मोर सुघ्घर भाग मा ।

तोर किरपा होय जे पर , भाग वोकर जाग थे ।
बाढ़ थे बल बुद्धि वोकर , गोठ बढ़िया लाग थे ।
बोल लेथे कोंदा मन हा , अंधरा सब देख थे ।
तोर किरपा होय माता  , पाँव बिन सब रेंग थे ।
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3
योग ला तैं रोज कर ले , भाग ही सब रोग हा ।
जाग तैंहा आज संगी , जाग ही सब लोग हा ।
देह रइही तोर सुघ्घर , बात ला तैं मान ले ।
रोग राई दूर होही , सार येला जान ले ।
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4
जाड़ लागय जोर से जी , ओढ सेटर शाल ला ।
ताप आगी बइठ के तैं , सेक दूनो गाल ला ।
बाँध ले तैं कान मुँह ला , हवा अब्बड़ आत हे ।
बनत हावय गरम भजिया , पेट भर सब खात हे ।
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5
हाथ पहिरे लाल चूड़ी  , होंठ लाली रंग हे ।
माथ बिन्दी चाँद जइसे  , देख के सब दंग हे ।
फूल गजरा मूड़ खोंचय , खोर तक ममहात हे ।
देख दरपन रूप सुघ्घर  , वो अबड़ मुसकात हे ।
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6
फूल फुलगे बाग सुघ्घर,  जे अबड़ ममहात हे ।
केंवरा अउ मोंगरा ला , गूँथ के सब लात हे ।
बेंचथे सब फूल माला , लोग लइका घूम के ।
पाय पइसा खाय रोटी  , नाचथे तब झूम के ।

पेट खातिर काम करथे , घूम के जी घाम मा ।
पोंसथे परिवार अपने  , फूल तीरथ धाम मा ।
माँग के नइ खाय कभ्भू  , राखय हवय लाज ला ।
काम करथे रात दिन तब , बाँधथे मुड़ ताज ला ।
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7
बोलथे जे मीठ भाखा , बात सुघ्घर लागथे ।
बात करुहा बोलथे ता , आदमी सब भागथे ।
बोल ले तैं मीठ बोली , तोर होही मान जी ।
याद रखही लोग तोला , तोर करही गान जी ।
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8
फेंक झन कचरा ल तैंहा , राख सुघ्घर साफ तैं ।
फेंकथे जे रोज वोला , आज कर दे माफ तैं ।
साफ करबे रोज तैंहा , बात वोहा मानही ।
सीख जाही देख के जी  , स्वच्छता ला जानही ।

साफ रइही गाँव सुघ्घर  , देख के सब जागही ।
स्वस्थ रइही लोग सब्बो , रोहर ग राई भागही ।
नाम होही देश भर मा , गाँव ला सब जानही ।
देखही सब साफ सुथरा , आदमी सब मानही ।
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9
राम के तैं नाम ले ले , रोज कर ले जाप ला ।
मोह माया छोड़ के तैं , काट सब्बो पाप ला ।
दीन दुखिया दान करबे , तोर लेही नाम जी ।
बोल भाखा मीठ बोली , होय सुघ्घर काम जी ।
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10
चेहरा हे चाँद जइसे  , मीठ बोली बोलथे ।
फूल गजरा मूँड़ डारे , नागिन सहीं डोलथे ।
माथ टिकली नाक नथली , पाँव पैरी बाजथे ।
होंठ लाली रूप सुघ्घर , अप्सरा जस लागथे ।
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11
पेड़ देथे छाँव अब्बड़  , फूल सुघ्घर लागथे ।
रोज खाबे फूल फल ला , रोग राई भागथे ।
काट झन तैं पेड़ ला जी , देव धामी मान ले ।
काम आथे लोग सबके  , आज तैंहा जान ले ।
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नियम
डाँड़ (पद) -- 4
चरण -- 8
यति -- 14 + 12 या 12 + 14 = 26 मात्रा
3 , 10 , 17 , अउ 24 वाँ मात्रा नान्हे (लघु) होय मा जादा गुरतुर लागथे ।

महेन्द्र देवांगन माटी
पंडरिया छत्तीसगढ़
8602407353
Mahendra Dewangan Mati

Saturday, 19 January 2019

छन्न पकैया

छन्न पकैया

छन्न पकैया छन्न पकैया,  आया नया जमाना ।
बात नहीं अब माने बच्चा , दिनभर गाये गाना ।।

छन्न पकैया छन्न पकैया  , जूता पहने बाटा ।
पैर नहीं छूते हैं अब तो , केवल करते टाटा ।।

छन्न पकैया छन्न पकैया  , घूमे बनकर हीरो ।
धूम धड़ाका करते रहते ,  पढ़ने में है जीरो ।।

छन्न पकैया छन्न पकैया  , बात करे वह चोखा ।
मीठी मीठी बातें करके  , देते सबको धोखा ।।

छन्न पकैया छन्न पकैया  , राज बहुत है गहरा ।
छूप छूप कर बातें करते , देते रहते पहरा ।।

महेन्द्र देवांगन माटी
पंडरिया छत्तीसगढ़
8602407353

Sunday, 13 January 2019

मकर संक्रांति मनाबो

मकर संक्रांति

तिल गुड़ के लाड़ू ला , मया बाँध के खाबो ।
आवव संगी जुर मिल के , मकर संक्रांति मनाबो ।।
दक्षिण में हे सूरज हा , उत्तर में  अब जाही ।
पूस के जाड़ा अब्बड़ हाबे , वहू अब भगाही ।।
आनी बानी रंग रंग के,  पतंग घलो उड़ाबो ।
आवव संगी जुर मिल के , मकर संक्रांति मनाबो ।।

सुत उठ के बिहनिया ले , नदियाँ नहाय बर जाबो ।
दीन दुखी ला दान करके , देवता दर्शन पाबो ।।
मकर रेखा में जाही सूरज  , दिन हा बाढ़त जाही ।
आवत हावय पूस पुन्नी हा , छेरछेरा घलो ह आही ।।
तिल गुड़ के बंधना कस , सबो समाज बंधाबो ।
आवव संगी जुर मिल के , मकर संक्रांति मनाबो ।।

महेन्द्र देवांगन माटी
( बोरसी - राजिम)
8602407353
Mahendra Dewangan Mati

Sunday, 30 December 2018

छत्तीसगढ़ वंदना

महानदी अउ अरपा पैरी , इंहा के मैहर थाती अंव ।
छत्तीसगढ़ के माटी अंव , मय छत्तीसगढ़ के माटी अंव ।
देवभोग बस्तर सरगुजा , सबमे रतन भराये हे ।
राजिम रायपुर बिलासपुर में,  मया के बोली समाये हे ।
दर्शन कर लो महामाया के, केशकाल के घाटी अंव ।
छत्तीसगढ़ के माटी अंव -------